यवतमाल में गहराया जलसंकट, बांधों में घटा जलस्तर, अब 3-4 दिन बाद मिल रहा नल का पानी
Yavatmal Water Crisis: यवतमाल में बारिश की कमी से जलाशयों का जलस्तर 33.70% रह गया है। प्रशासन ने 31 अगस्त 2026 तक सिंचाई का पानी रोककर केवल पेयजल आपूर्ति को प्राथमिकता देने का फैसला किया है।
- Written By: केतकी मोडक
यवतमाल पानी संकट प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
Yavatmal Dam Water Level: मृग नक्षत्र शुरू हुए करीब 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन जिले में अब तक बारिश की एक बूंद भी नहीं गिरी है। लगातार बढ़ती गर्मी और तेज धूप के कारण जलाशयों में वाष्पीकरण की गति बढ़ गई है, जिससे जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। परिणामस्वरूप जिले में जलसंकट गहराता जा रहा है। पहले एक दिन छोड़कर मिलने वाला नल का पानी अब तीन से चार दिन के अंतराल पर मिल रहा है, जिससे नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
भारतीय मौसम विभाग द्वारा राज्य में एल-नीनो के प्रभाव की संभावना व्यक्त किए जाने के बाद सरकार ने सभी जिला प्रशासन को पेयजल सुरक्षा के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। 31 अगस्त 2026 तक नागरिकों को निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यवतमाल जिले के बांधों और जलाशयों में उपलब्ध पानी को सुरक्षित रखने का निर्णय लिया गया है।
केवल पीने के लिए मिलेगा पानी
इसके तहत सिंचाई के लिए चल रहे अथवा प्रस्तावित जल आवर्तन स्थगित कर दिए गए हैं। सरकारी आदेश के अनुसार पेयजल के लिए आरक्षित जलसंचय का उपयोग अत्यावश्यक परिस्थितियों को छोड़कर अन्य किसी उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकेगा। कुछ गांवों में लोगों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
सम्बंधित ख़बरें
संभाजीनगर में बड़े इंडस्ट्रियल बूस्ट की तैयारी; ‘ऑरिक’ की 520 एकड़ आवासीय भूमि अब उद्योगों के लिए आवंटित
भांडुप रैली में गरजे उद्धव ठाकरे, बागी सांसदों को बताया विश्वासघाती, अमित शाह पर भी साधा निशाना
नासिक में बोले गिरीश महाजन-पूरी दुनिया ने माना योग का लोहा, यह केवल व्यायाम नहीं बल्कि सकारात्मक जीवन की कुंजी
गोंदिया में गड्ढों में बैठकर किया योग, सड़क मरम्मत की मांग को लेकर युवाओं का अनोखा प्रदर्शन
यवतमाल शहर में पहले एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति होती थी, लेकिन अब तीन से चार दिन बाद पानी मिल रहा है। मृग नक्षत्र बीत जाने के बाद भी बारिश के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। बढ़ते तापमान के कारण जलसंकट और गहरा गया है। जिले की 73 छोटी-बड़ी जल परियोजनाओं में वर्तमान में केवल 33.70 प्रतिशत पानी शेष है। इसमें तीन बड़े प्रकल्पों में 34.90 प्रतिशत, सात मध्यम प्रकल्पों में 43.53 प्रतिशत तथा 63 लघु प्रकल्पों में 22.57 प्रतिशत जलसंचय उपलब्ध है।
यह भी पढ़ें:- गोंदिया में गड्ढों में बैठकर किया योग, सड़क मरम्मत की मांग को लेकर युवाओं का अनोखा प्रदर्शन
तालाब, नदियों से सिंचाई की तो होगी कार्रवाई
बांधों, नहरों, नदियों और तालाबों से अवैध जलउपसा रोकने के लिए राजस्व, पुलिस और जलसंपदा विभाग की संयुक्त टीमें विशेष अभियान चलाएंगी। अनधिकृत पंप, मोटर, पाइपलाइन अथवा अन्य साधन पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
