तासलोट जंगल शव मामला आरोपी गिरफ्तार (सौजन्य-नवभारत)
Kalamb Police Station Yavatmal: यवतमाल जिले के कलंब पुलिस थाना क्षेत्र अंतर्गत तासलोट जंगल में मिले अज्ञात महिला के शव के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए हत्या की गुत्थी सुलझा ली है। स्थानीय अपराध शाखा की टीम ने जांच के बाद इस मामले में एक युवक और एक विधि संघर्षित नाबालिग को गिरफ्तार किया है। 15 मार्च को तासलोट जंगल क्षेत्र में एक अज्ञात महिला का शव अत्यंत सड़ी-गली अवस्था में मिला था।
शव का चेहरा जला हुआ था और जंगली जानवरों द्वारा नुकसान पहुंचने के कारण पहचान करना बेहद मुश्किल हो गया था। इस घटना से पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई थी। लगभग 13 दिनों बाद महिला के शव का शिनाख्त करने के साथ ही हत्यारों को पकड़ने में पुलिस ने सफलता प्राप्त की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर कुल 8 विशेष जांच टीमें गठित की गईं।
इनमें एलसीबी की 6, एसडीपीओ की 1 और कलंब थाने की 1 टीम का समावेश रहा। इन टीमों ने एक साथ कई दिशाओं में जांच शुरू की और तकनीकी तथा पारंपरिक दोनों तरीकों का इस्तेमाल किया। मृत महिला की पहचान चापडोह निवासी रानी किशोर वानखेडे (26) के रूप में हुई। इस मामले में मुख्य आरोपी सतीश रमेश कश्यप (20), जो गोलगप्पा विक्रेता है, और एक नाबालिग को गिरफ्तार किया गया।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने 10 मार्च 2026 को महिला को पुणे से यवतमाल बुलाया। इसके बाद 11 मार्च को दोनों तासलोट जंगल क्षेत्र में गए। यहां पर दोनों के बीच प्रेम संबंध को लेकर विवाद हुआ। आरोपी ने गला दबाकर और चाकू से वार कर महिला की हत्या कर दी। पहचान छिपाने के लिए शव को जलाने की कोशिश की गई।
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यह मामला सुलझाने में पुलिस अधीक्षक कुमार चिंता, अपर पुलिस अधीक्षक अशोक थोरात, उपविभागीय पुलिस अधिकारी दिनेश बैसाने के मार्गदर्शन में एलसीबी पुलिस निरीक्षक सतीश चवरे, कलंब थाना निरीक्षक राजेश राठोड, एलसीबी के एपीआई मनीष गावंडे, पवन राठोड, गजानन राजमल्लु, धनराज हाके, शरद लोहकरे ने मेहनत की।
पुलिस ने इस केस को सुलझाने के लिए व्यापक स्तर पर जांच करते हुए लगभग 40,000 मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच की गई। इतना ही नहीं तो 196 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले गए। जिले में दर्ज 84 लाफ्ता महिलाओं के मामलों की पड़ताल की गई।
चप्पल के आधार पर विभिन्न राज्यों के डीलरों से संपर्क किया, कंगन और चांदी के पायल के जरिए दुकानदारों से पूछताछ की गई। आसपास के 40 किलोमीटर क्षेत्र में गांव-गांव जाकर जानकारी जुटाई गई, मतदाता सूची, राशन कार्ड, सामाजिक योजनाओं के रिकॉर्ड की भी छानबीन की गई।