यवतमाल में किसान ने आर्थिक संकट से परेशान होकर फांसी लगाकर की आत्महत्या, फसल ने नहीं दिया साथ, कर्ज बना चिंता

Yavatmal Farmer Suicide Soybean Crop: यवतमाल नेर में दो बार सोयाबीन की बुआई के बावजूद अंकुरण नहीं होने से परेशान 40 वर्षीय किसान ने आत्महत्या कर ली। किसान के पास करीब 5 एकड़ कृषि भूमि थी।
Yavatmal Ner Farmer Suicide Tragedy
नेर में किसान ने आत्महत्या कीसोर्स: सोशल मीडिया
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Yavatmal Ner Farmer Suicide Tragedy: यवतमाल नेर में दो बार सोयाबीन की बुआई करने के बावजूद फसल अंकुरित नहीं होने से परेशान 40 वर्षीय किसान कापेर मंगूलाल पवार ने आत्महत्या कर ली।

किसान के पास करीब पांच एकड़ कृषि भूमि थी और लगातार बुआई का खर्च व्यर्थ जाने से वे आर्थिक संकट में बताए जा रहे थे।

यवतमाल नेर में किसान ने की आत्महत्या

सोयाबीन की फसल के अंकुरित नहीं होने से परेशान एक किसान ने आत्महत्या कर ली। यवतमाल जिले के नेर क्षेत्र में दो बार बुआई के बावजूद खेत में फसल नहीं उगी, जिससे किसान पर आर्थिक संकट बढ़ गया था।

बताया गया है कि करीब पांच एकड़ जमीन के मालिक किसान ने लगातार बुआई में खर्च होने के बाद गुरुवार रात आत्महत्या कर ली। घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

दो बार बुआई के बाद भी नहीं उगी फसल

आर्जती खाकी पारधी बस्ती में गुरुवार रात करीब 11 बजे किसान कापेर मंगूलाल पवार (40) ने आत्महत्या कर ली। जानकारी के अनुसार, उनके पास करीब पांच एकड़ स्वामित्व वाली कृषि भूमि थी।

इस वर्ष खरीफ सीजन में उन्होंने अपने खेत में दो बार सोयाबीन की बुआई की थी। हालांकि, दोनों बार सोयाबीन के बीजों का अपेक्षित अंकुरण नहीं हुआ। लगातार बुआई के बाद भी फसल नहीं उगने से खेती पर किया गया खर्च भी व्यर्थ चला गया।

फसल नहीं उगी तो बढ़ा आर्थिक संकट

सोयाबीन की फसल के लगातार असफल रहने से कापेर पवार आर्थिक परेशानी में आ गए थे। खेती में दोबारा बुआई के लिए किया गया खर्च निकल नहीं पाया और फसल से होने वाली संभावित आय पर भी संकट खड़ा हो गया।

परिजनों और आसपास के लोगों के अनुसार, फसल नहीं उगने की स्थिति को लेकर वे काफी चिंतित बताए जा रहे थे। इसी बीच गुरुवार रात उन्होंने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या (किसान आत्महत्या) कर ली।

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घटना के बाद इलाके में शोक

घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। परिवार के कमाने वाले सदस्य की मौत से परिजनों पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

खेती में लगातार नुकसान और खरीफ फसल की स्थिति को लेकर किसान परिवारों की चिंता के बीच यह घटना सामने आई है। किसान की आत्महत्या के कारणों की परिस्थितियों की स्थानीय स्तर पर जांच की जा रही है।

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