

Maharashtra Drought Crisis NDRF Relief Fund: महाराष्ट्र का आधा हिस्सा सूखे की स्थिति से जूझ रहा है। राज्य के 36 में से 19 जिलों के 83 तहसीलों में पिछले 40-45 दिनों से बारिश की एक बूंद भी नहीं हुई है। खरीफ का मौसम हाथ से निकल जाने के कारण किसान बेहाल हैं। ऐसे संकट के बीच केंद्र सरकार ने महज 50 करोड़ रुपए की मामूली राशि देकर राज्य की खानापूर्ति कर दी है।
यह राशि 5 जिलों की 10 तहसीलों के 90 गांवों के लिए है, राष्ट्रीय आपदा राहत कोष से प्राप्त इस राशि को पुणे स्थित कृषि आयुक्तालय के माध्यम से खर्च करने की राज्य सरकार ने मंजूरी दी है। इस संबंध में शासनादेश भी जारी किया गया है।
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सूखा राहत के लिए अहिल्यानगर, नासिक, धुले, सातारा और लातूर इन पांच जिलों का चयन किया है। इनमें प्रत्येक जिले की दो तहसीलों यानी कुल 10 तहसीलों के 90 गांवों को परियोजना में शामिल किया गया है।
राज्य के तैयार किए गए प्रारूप के अनुसार केंद्र के 100 करोड़ रुपए के हिस्से में से पहले चरण में 50 करोड़ रुपए राहत एवं पुनर्वास विभाग को मिले हैं। यह राशि कृषि विभाग को हस्तांतरित कर दी गई है। अब कृषि आयुक्तालय को इसके वितरण की मंजूरी दी गई है।
कृषि आयुक्त नियंत्रण अधिकारी होंगे। सहायक संचालक, लेखा-1 को आहरण एवं संवितरण अधिकारी बनाया गया है।
केंद्र के निर्देशों के अनुसार ही निधि का उपयोग करना अनिवार्य होगा, लेखापरीक्षण रिपोर्ट और उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने होंगे। भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की रिपोर्ट हर महीने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस परियोजना के लिए राज्य सरकार ने दिसंबर 2025 में 174।10 करोड़ रुपए के प्रारूप को प्रशासनिक मंजूरी दी थी। इसमें केंद्र का हिस्सा 100 करोड़ रुपए, राज्य का हिस्सा 11 करोड़ रुपए और 63।10 करोड़ रुपए विभिन्न सरकारी योजनाओं के अभिसरण से मिलने थे।
हालांकि, खरीफ का मौसम पूरी तरह बर्बाद होने के बाद केंद्र की ओर से जारी की गई यह राशि बेहद मामूली साबित हो रही है। आसमानी संकट में फंसे किसानों के लिए यह मदद महज ऊपरी मरहम-पट्टी साबित होने के आसार हैं।