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यवतमाल में 16 जून से ‘स्टॉप डायरिया अभियान’, बाल मृत्यु दर घटाने पर फोकस

Monsoon Health Alert: देश में 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की कुल मौतों में 4.8% मौतें डायरिया से होती हैं। इसे रोकने के लिए राज्य में 16 जून से 'स्टॉप डायरिया अभियान' शुरू किया जा रहा है।

  • Written By: केतकी मोडक
Updated On: Jun 07, 2026 | 01:18 PM

प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)

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Yavatmal Stop Diarrhea Campaign Monsoon: देश में पांच वर्ष से कम आयु के मासूम बच्चों की सेहत को लेकर एक बेहद चिंताजनक और डराने वाला आंकड़ा सामने आया है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, इस आयु वर्ग के बच्चों में होने वाली कुल मौतों में से लगभग 4.8 प्रतिशत मौतों की अकेली सबसे बड़ी वजह डायरिया है। इस जानलेवा बीमारी की वजह से दम तोड़ने वाले नौनिहालों की मृत्यु दर में भारी कमी लाने के संकल्प के साथ, महाराष्ट्र सरकार और जिला स्वास्थ्य विभाग ने एक बहुत बड़े महा-अभियान का शंखनाद कर दिया है।

पूरे राज्य सहित यवतमाल जिले में आगामी 16 जून से 31 जुलाई तक ‘स्टॉप डायरिया अभियान’ पूरी ताकत से चलाया जाएगा। अभियान के पुख्ता क्रियान्वयन के लिए जिला स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय ने जिले के सभी तहसील स्वास्थ्य अधिकारियों और प्राथमिक चिकित्सा अधिकारियों को कड़े और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

वर्षा ऋतु का दूषित पानी बनता है काल

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, डायरिया मुख्य रूप से वर्षा ऋतु (मानसून) के दौरान गांवों और शहरों में सप्लाई होने वाले दूषित पानी के सेवन और गंदगी के कारण तेजी से पैर पसारता है। इस बीमारी के हमले के बाद बच्चों के शरीर में पानी और बेहद जरूरी पोषक लवणों की भारी कमी हो जाती है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में ‘डिहाइड्रेशन’ कहा जाता है।

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शुरुआत में माता-पिता इसे एक बेहद सामान्य या हल्की-फुल्की बीमारी समझने की भूल कर बैठते हैं, लेकिन यदि सही समय पर पीड़ित बच्चे को उचित और सटीक उपचार न मिले, तो यह बीमारी कुछ ही घंटों में बेहद गंभीर रूप अख्तियार कर लेती है और बच्चे के लिए सीधे जानलेवा साबित होती है।

“डायरिया पर करें वार…”

स्वास्थ्य मंत्रालय का स्पष्ट मानना है कि यदि डायरिया के शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए और बच्चों को तत्काल प्राथमिक मेडिकल ट्रीटमेंट दे दिया जाए, तो बाल मृत्यु दर के इन खौफनाक आंकड़ों को तेजी से नीचे लाया जा सकता है। इसी उद्देश्य के साथ इस वर्ष के विशेष अभियान का मुख्य नारा “डायरिया पर करें वार, स्वच्छता और ओआरएस का दें साथ” निर्धारित किया गया है। इस पूरे अभियान को पूरी पारदर्शिता के साथ दो अलग-अलग चरणों में जमीन पर उतारा जाएगा:

  • पहला चरण: इस प्रारंभिक अवधि के दौरान जिला स्तर पर ठोस योजना निर्माण, विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय स्थापित करना, मैदानी स्तर पर काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों का सघन प्रशिक्षण और तहसील स्तरीय कार्यबल का मजबूत गठन किया जा रहा है।
  • दूसरा चरण: इस मुख्य चरण में पूरे जिले के ग्रामीण इलाकों में व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, आशा वर्करों के जरिए घर-घर जाकर जीवन रक्षक ओआरएस के पैकेट और जिंक की गोलियों का मुफ्त वितरण होगा तथा स्वच्छता बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

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स्वास्थ्य केंद्रों में रहेगा दवाओं का बंपर स्टॉक

अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए यवतमाल प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। सभी छोटे-बड़े ग्रामीण उप-स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक अस्पतालों में ओआरएस और जिंक टैबलेट्स का पर्याप्त और एडवांस बंपर स्टॉक सुरक्षित रखने की हिदायत दी गई है। इसके साथ ही रेडियो, पोस्टर्स और सूचना-शिक्षा-संचार गतिविधियों के माध्यम से स्वास्थ्य कर्मी गांव-गांव और सुदूर ढाणियों तक जाकर माताओं को स्वच्छता का पाठ पढ़ाएंगे।

यवतमाल जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने लापरवाही बर्दाश्त न करने की चेतावनी देते हुए इस पूरे महा-अभियान की जमीनी हकीकत बयां करने वाली समग्र अंतिम रिपोर्ट आगामी 5 अगस्त तक मुख्य जिला कार्यालय में हर हाल में प्रस्तुत करने का सख्त आदेश जारी किया है।

Yavatmal maharashtra stop diarrhea campaign child mortality rate control 2026

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Published On: Jun 07, 2026 | 01:18 PM

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