

Yavatmal Vidarbha Farmer Crisis: यवतमाल देश भर में किसानों की लूट और शोषण का अंतिम चरण आत्महत्या पर जाकर खत्म होता है। इस लूट इको सिस्टम से सर्वाधिक पीड़ित क्षेत्र विदर्भ है। यहां किसान आत्महत्या प्रभावित जिलों में शामिल यवतमाल में किसानों की आत्महत्या का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में ही जिले में 105 किसानों ने आत्महत्या कर ली है। इनमें से 69 मामलों की जांच अभी भी लंबित है, जबकि 17 मामलों को सहायता के लिए पात्र और 19 मामलों को अपात्र घोषित किया गया है।
जिले में किसान आत्महत्या की पहली दर्ज घटना वर्ष 1986 में साहेबराव करपे के रूप में सामने आई थी। इसके बाद वर्ष 2001 से शासन स्तर पर किसान आत्महत्याओं का आधिकारिक रिकॉर्ड रखा जाने लगा। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2001 से 2006 के बीच 777 किसानों ने आत्महत्या की थी। बढ़ती घटनाओं को देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में इस गंभीर समस्या पर राष्ट्रीय स्तर पर विचार किया गया और राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन किया गया। साथ ही विदर्भ के लिए विशेष आर्थिक पैकेज और कर्जमाफी की घोषणा भी की गई।
बावजूद इसके आत्महत्याओं पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाया। कृषि क्षेत्र में लगातार बढ़ते संकट, प्राकृतिक आपदाएं, सूखा, फसल नुकसान, साहूकारों और बैंकों का कर्ज, बीमारी तथा कृषि उत्पादों को उचित मूल्य नहीं मिलने जैसी समस्याओं ने किसानों की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है।
खेती लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है, जिसके चलते किसानों में निराशा बढ़ रही है। वर्ष 2001 से 2026 तक के 25 वर्षों में जिले में कुल 6,625 किसानों ने आत्महत्या की है। इनमें से 2,763 मामलों को पात्र माना गया, जबकि 3,785 मामलों को विभिन्न कारणों से अपात्र घोषित किया गया। 77 मामले अब भी जांच प्रक्रिया में लंबित हैं।
| माह | कुल मामले | पात्र | अपात्र |
|---|---|---|---|
| जनवरी | 19 | 8 | 8 |
| फरवरी | 21 | 5 | 3 |
| मार्च | 22 | 1 | 5 |
| अप्रैल | 28 | 3 | 2 |
| मई | 15 | 1 | 1 |
| कुल | 105 | 17 | 19 |