

Bangaon Leopard Incident: यवतमाल जिले के नेर तहसील के वनपरिक्षेत्र सीमा से लगे लोणाडी, सिंदखेड, जवलगांव, बाणगांव और मालखेड़ के खेत क्षेत्रों तथा पगडंडी रास्तों पर जंगली जानवरों की आवाजाही आम बात हो गई है। इससे क्षेत्र के नागरिकों में हमेशा भय का माहौल बना रहता है। 3 मार्च की रात के समय बाणगांव के खेत क्षेत्र, सर्वे नंबर 18/2 स्थित एक खेत की कुएं में एक तेंदुआ गिर गया।
तेंदुए की आवाज सुनकर बेबी रमेश राठोड़ खेत की ओर गईं। कुएं के पास पहुंचने पर उन्हें अंदर से किसी जंगली जानवर की आवाज सुनाई दी। जब उन्होंने कुएं में झांककर देखा तो उसमें तेंदुआ होने की पुष्टि हुई। उन्होंने तुरंत नेर के वनपरिक्षेत्र अधिकारी सुभाष लंबे को फोन पर सूचना दी।
सूचना मिलते ही लंबे ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया तथा यवतमाल से वन विभाग की त्वरित कार्रवाई दल को बुलाया गया। 4 मार्च की सुबह लगभग 11 बजे अथक प्रयासों के बाद वन विभाग की टीम ने कुएं में पिंजरा डालकर तेंदुए को सुरक्षित रूप से उसमें कैद कर लिया। जैसे ही पिंजरे को कुएं से बाहर निकाला गया, उपस्थित नागरिकों ने राहत की सांस ली।
यह रेस्क्यू ऑपरेशन उपवन संरक्षक धनंजय वायभासे तथा उपविभागीय वन अधिकारी भुवनेश्वर नारा के मार्गदर्शन में वनपरिक्षेत्र अधिकारी सुभाष लंबे के नेतृत्व में त्वरित कार्रवाई दल प्रमुख शाम जोशी, वनरक्षक अनिल मोहड, सुनील लोहकरे, मालखेड़े, पंकज नारे, पवन नाटकर, रोशन बागड़े, प्रतिभा अहिर, चेतन झंझाल, चंदा बागड़े, आरती देशमुख, भास्कर बांडे और सुचित्रा वगारे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह एक मादा तेंदुआ है, जिसकी उम्र लगभग चार से पांच वर्ष बताई जा रही है। रेस्क्यू के बाद पशुधन विकास अधिकारी गोंडवे द्वारा उसकी स्वास्थ्य जांच की गई। जांच के उपरांत तेंदुए को वन विभाग की सुरक्षित सीमा में छोड़ दिया गया।