बाल विवाह रोका (सौजन्य-सोशल मीडिया)
District Child Protection Unit Yavatmal: यवतमाल जिले के केलापुर तहसील के करणवाड़ी गांव में आयोजित होने वाले तीन नाबालिग बालिकाओं के बाल विवाह को जिला बाल संरक्षण कक्ष और स्थानीय प्रशासन की सतर्कता से समय रहते रोक दिया गया। करणवाड़ी में तीन नाबालिग लड़कियों के विवाह की गुप्त सूचना प्रशासन को मिली थी।
इस सूचना के आधार पर जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी विशाल जाधव, पुलिस निरीक्षक एल. डी. तावरे, जिला बाल संरक्षण अधिकारी देवेंद्र राजुरकर तथा चाइल्ड हेल्पलाइन समन्वयक फाल्गुन पालकर के मार्गदर्शन में प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन बाल विवाहों को रोकने में सफलता प्राप्त की।
इस कार्रवाई में सामाजिक कार्यकर्ता आकाश बुर्रेवार, सहायक पुलिस निरीक्षक रमाकांत खंदारे, चाइल्ड हेल्पलाइन पर्यवेक्षक गणेश आत्राम, ग्रामसेवक डी. टी. पेटवूले, पुलिस पाटिल निलेश पुणेकर, आंगनवाड़ी सेविका सुनंदा डेहनकर तथा एस. ए. पुणेकर का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
सभी संबंधित अधिकारी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और परिजनों को बाल विवाह प्रतिबंधक कानून तथा इसके दुष्परिणामों के बारे में जानकारी देकर समुपदेशन किया, जिसके बाद तीनों बाल विवाह रोक दिए गए। इस दौरान बालिकाओं के अभिभावकों से लिखित में यह आश्वासन भी लिया गया कि वे अपनी बेटियों का विवाह 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने के बाद ही करेंगे।
जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी विशाल जाधव ने कहा बाल विवाह केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह एक बालिका के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। जिले में कहीं भी ऐसी घटना की जानकारी मिले तो नागरिक तुरंत प्रशासन या 1098 हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें। बाल विवाह कराने वाले माता-पिता, पुरोहित और इसमें शामिल अन्य लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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सामाजिक कार्यकर्ता आकाश बुर्रेवार ने कहा जब हम करणवाड़ी पहुंचे, तब स्थिति संवेदनशील थी। लेकिन ग्राम स्तर की समिति और पुलिस प्रशासन के सहयोग से हम परिजनों को समझाने में सफल रहे। लड़कियों की शिक्षा पूरी होना और उनका स्वास्थ्य सुरक्षित रखना समाज की जिम्मेदारी है। बाल विवाह मुक्त जिला बनाने के लिए हमारा प्रयास जारी रहेगा।