

Yavatmal Education Department: यवतमाल जिले के वणी तहसील के कवडशी गांव स्थित जिला परिषद प्राथमिक स्कूल की जर्जर इमारत की बरामदे की दीवार 24 अगस्त की सुबह स्कूल शुरू रहने के दौरान अचानक ढह गई। हालांकि इस घटना में किसी विद्यार्थी को चोट नहीं आई। प्रशासन की कथित लापरवाही के कारण स्कूल में पढ़ने वाले 23 विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कवडशी स्थित जिला परिषद प्राथमिक स्कूल में कक्षा पहली से पांचवीं तक की पढ़ाई होती है।
स्कूल की दो कक्षाएं लंबे समय से बेहद जर्जर और खतरनाक स्थिति में हैं। इन कक्षाओं को गिराकर वहां नए कमरों का निर्माण कराने के लिए स्कूल प्रबंधन समिति, ग्राम पंचायत और ग्रामीणों की ओर से दिसंबर 2025 से लगातार प्रशासन से मांग की जा रही है। पंचायत समिति, शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन को कई बार ज्ञापन देने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है।
ग्रामीणों के अनुसार, जर्जर कक्षाओं के संबंध में 30 दिसंबर 2025 और 3 फरवरी 2026 को प्रशासन को लिखित ज्ञापन सौंपे गए थे। इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी रही। इससे पहले भी स्कूल की एक कक्षा का कुछ हिस्सा गिर चुका था। इसके बाद भी इमारत को गिराकर नए निर्माण की दिशा में आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई। आखिरकार 24 अगस्त को स्कूल शुरू रहने के दौरान बरामदे की दीवार भी ढह गई।
घटना के बाद विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूल की कक्षाएं अस्थायी रूप से ग्राम पंचायत कार्यालय में संचालित करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थायी समाधान नहीं है। विद्यार्थियों के लिए तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।
कवडशी स्कूल के 23 विद्यार्थियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी तय करते हुए जर्जर इमारत का मुद्दा तत्काल हल करने की मांग ओर पकड़ रही है। ग्रामीणों ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर दो नए कक्षों को मंजूरी देने, जर्जर कक्षाओं को गिराने तथा विद्यार्थियों के लिए अस्थायी शेड बनाने हेतु निधि उपलब्ध कराने की मांग की है।
इस अवसर पर विजय पिदुरकर, महादेव दातारकर, वंदना काकडे, संध्या दूमणे, छाया चिडे, चंद्रकांत भेडाडे, सुलोचना बुच्छे रेश्मा वासेकर, विद्या दिनेश येटे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तत्काल ठोस निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।