ग्राम पंचायत निधि की गड़बड़ी में सिर्फ ग्रामसेवक पर कार्रवाई क्यों? सरपंच-उपसरपंच की जवाबदेही तय करने की मांग
Yavatmal Fund Irregularities: यवतमाल में ग्राम पंचायत निधि की आर्थिक अनियमितताओं पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।
- Written By: आंचल लोखंडे
यवतमाल ग्राम पंचायत- फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
Yavatmal Gram Panchayat: ग्राम पंचायतों में निधि की अफरातफरी अथवा आर्थिक अनियमितता सामने आते ही कार्रवाई की गाज अक्सर ग्रामसेवक या ग्राम पंचायत अधिकारी पर गिरती है। उसे निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी जाती है। लेकिन जिस ग्राम पंचायत के आर्थिक फैसले सामूहिक प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं, वहां सरपंच, उपसरपंच और अन्य सदस्यों की भूमिका की जांच कितनी गंभीरता से होती है? यदि निर्णय सामूहिक है तो जिम्मेदारी केवल सचिव की ही क्यों? यह सवाल अब ग्रामीणों में जोर पकड़ रहा है।
सरपंच और सदस्यों की भूमिका पर सवाल
ग्राम पंचायत का निधि खर्च ग्रामसेवक की मर्जी से नहीं होता। विकास कार्यों को ग्राम पंचायत की मासिक सभा में मंजूरी, उसके बाद ग्रामसभा की स्वीकृति, प्रस्ताव, कार्यादेश, देयक और भुगतान जैसी पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। विकास कार्यों के बिलों पर सरपंच और सचिव के हस्ताक्षर भी आवश्यक होते हैं।
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ऐसे में आर्थिक गड़बड़ी सामने आने पर संबंधित सभी पदाधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। हालांकि, कई मामलों में जांच के बाद केवल ग्रामसेवक पर निलंबन अथवा विभागीय कार्रवाई की जाती है, जबकि सरपंच, उपसरपंच और संबंधित सदस्यों की जवाबदेही पर सवाल अनुत्तरित रह जाते हैं। इससे कार्रवाई की निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा होना स्वाभाविक है।
सरपंच पर भी हो कार्रवाई…
यवतमाल के पॅरा विधी स्वयंसेवक एवं नोडल अधिकारी, मानव-वन्यजीव संघर्ष, जिल्हा विधी सेवा प्राधिकरण (जिल्हा व सत्र न्यायालय), वासुदेव विधाते ने कहा कि सरपंच, उपसरपंच, ग्राम पंचायत अधिकारी तथा अन्य सदस्य पंचायत के कामकाज से जुड़े जिम्मेदार घटक हैं। आर्थिक अनियमितता में सचिव दोषी है तो कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन यदि सरपंच अथवा अन्य पदाधिकारी भी दोषी पाए जाते हैं तो उन पर भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। केवल सचिव को निलंबित करना उचित नहीं है। ग्राम पंचायत निधि की गड़बड़ी में असली दोषी कौन है, यह पद देखकर नहीं बल्कि दस्तावेजी साक्ष्यों और जांच के आधार पर तय होना चाहिए।
