यवतमाल में किसानों का हल्लाबोल आंदोलन, फसल बीमा और कर्जमाफी की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे सैकड़ों किसान
Vidarbha Crop Insurance Delay: यवतमाल में कर्जमाफी और लंबित फसल बीमा को लेकर किसानों ने 'हल्लाबोल मोर्चा' निकाला। मांगें पूरी न होने पर 15 दिनों में आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई है।
- Written By: केतकी मोडक
यवतमाल किसान जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए (सोर्स - फोटो नवभारत)
Yavatmal Farmers Hallabol Morcha Protest: विदर्भ के प्रमुख कृषिप्रधान जिले यवतमाल से इस वक्त किसानों के बड़े आक्रोश की खबर आ रही है। जिले के किसानों की विभिन्न लंबित और गंभीर समस्याओं की ओर सरकार का उदासीन ध्यान आकर्षित करने के लिए बुधवार को समस्त किसान बंधुओं की ओर से शहर में एक विशाल ‘हल्लाबोल आंदोलन’ किया गया। स्थानीय आंबेडकर स्मारक से शुरू हुआ यह जनसैलाब मोर्चा जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा, जहां सैकड़ों की संख्या में उपस्थित किसानों ने अपनी जायज मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
आक्रोशित नारों से गूंजा जिलाधिकारी कार्यालय
प्रदर्शन के दौरान किसानों का गुस्सा चरम पर था। जिलाधिकारी कार्यालय के परिसर में किसानों ने “फसल बीमा हमारा अधिकार है”, “एक जिला तीन-तीन मंत्री, मंत्री मलाई खाएं किसान भूखे रहें”, “सभी किसानों की कर्जमाफी करो”, “अनुदानित डीएपी और यूरिया तत्काल उपलब्ध कराओ” तथा “किसान एकता जिंदाबाद” जैसे कड़े और तीखे नारे लगाकर अपना गहरा रोष व्यक्त किया।
आंदोलन के दौरान किसान प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राज्य के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस और कृषि मंत्री दत्तात्रय विठोबा भरणे को एक विस्तृत और मांग आधारित ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में जिले के किसानों की वर्तमान विकट स्थिति का उल्लेख करते हुए कई महत्वपूर्ण मांगें शासन के समक्ष रखी गईं।
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सातबारा कोरा करने और लंबित फसल बीमा मंजूर करने की गुहार
आंदोलनकारियों ने मुख्य रूप से मांग की है कि सोयाबीन, कपास, तुअर एवं अन्य खरीफ फसलों का पिछले काफी समय से लंबित फसल बीमा तत्काल मंजूर किया जाए और सहायता राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा की जाए। इसके साथ ही ‘अहिल्याबाई होलकर किसान कर्जमुक्ति योजना’ के अंतर्गत जिले के तमाम छोटे-बड़े किसानों की पूर्ण कर्जमाफी की जाए और उनके भूमि अभिलेख यानी ‘सातबारा’ को पूरी तरह से कोरा (ऋणमुक्त) किया जाए।
इसके अलावा किसानों ने बाजार में धड़ल्ले से बिक रहे नकली बीज और उर्वरक बेचने वाले केंद्न संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने, बुवाई के लिए DAP एवं यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और खेती के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग भी प्रमुखता से उठाई है।
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लगातार गिरते दामों और प्राकृतिक आपदा से टूट चुकी है कमर
सौंपे गए ज्ञापन में किसानों ने अपना दुखड़ा सुनाते हुए कहा कि यवतमाल विदर्भ का एक प्रमुख कृषि प्रधान केंद्र है, जहां मुख्य रूप से कपास, सोयाबीन, तुअर, चना, गेहूं और ज्वार जैसी फसलें उगाई जाती हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से लगातार फसल खराब होने, बेमौसम बारिश, अतिवृष्टि, बढ़ती उत्पादन लागत, नकली कृषि सामग्री के कारण होने वाले धोखे, बिजली संकट, वन्यजीवों के बढ़ते हमलों और सबसे बढ़कर फसलों को बाजार में उचित मूल्य न मिलने से किसान गहरे आर्थिक दलदल में फंस गए हैं।
आंदोलनकारी किसान संगठनों ने प्रशासन के जरिए सरकार को कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि यदि आगामी 15 दिनों के भीतर उनकी इन मांगों पर सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो विदर्भ के किसान शांत नहीं बैठेंगे। इसके अगले चरण में राज्य के पालकमंत्री संजय राठोड के स्थानीय निवास स्थान पर एक विशाल मोर्चा निकाला जाएगा और इस राज्यव्यापी लोकतांत्रिक आंदोलन को और अधिक उग्र व तीव्र किया जाएगा।
