

Soybean Production Decline: यवतमाल जिले में काफी समय से बारिश नहीं होने का खरीफ फसलों पर बड़ा असर पड़ा है। जिले में इस वर्ष 2 लाख 72 हजार 498 हेक्टेयर में सोयाबीन और 4 लाख 83 हजार 998 हेक्टेयर में कपास की बुआई हुई है। इस तरह करीब 7 लाख 56 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में इन दो प्रमुख फसलों की खेती की गई है।
हालांकि, बारिश के अभाव में दोनों फसलों की स्थिति खराब हो गई है। कृषि विभाग के प्राथमिक अनुमान के अनुसार कपास के उत्पादन में करीब 50 प्रतिशत, जबकि सोयाबीन के उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक कमी आने की संभावना है। मुंह तक आया निवाला प्रकृति ने छीन लिया है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
करीब एक माह बाद दिवाली का त्योहार है और किसानों की आर्थिक स्थिति खरीफ उत्पादन पर निर्भर रहती है। लेकिन इस वर्ष बारिश के लंबे खंड के कारण उत्पादन में भारी गिरावट के संकेत हैं। ऐसे में दिवाली का त्योहार कैसे मनाएं, कर्ज की अदायगी कैसे करें और अगले सीजन की तैयारी कैसे करें, यह सवाल किसानों के सामने खड़ा हो गया है। खासकर सोयाबीन में फलियां भरने के समय पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन बारिश नहीं होने से कई क्षेत्रों में फलियां पूरी तरह नहीं भर पाई हैं। वहीं, कपास की वृद्धि रुकने के साथ ही बोंडधारण पर भी असर पड़ा है।
जिले में बारिश की स्थिति और फसल परिस्थिति को देखते हुए कई तहसीलों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो गई है। सरकार ने सूखाग्रस्त तहसीलों के लिए विभिन्न रियायतों और उपायों की घोषणा की है। फसल ऋण के पुनर्गठन के साथ ही कृषि से जुड़े कर्ज की वसूली पर स्थगन देने की प्रक्रिया भी शरू है।
फसल परिस्थिति का जायजा लेते समय अर्जुना के नुकसानग्रस्त किसानों ने खेतों में हुए नुकसान और बढ़ी हुई उत्पादन लागत को देखते हुए सरकार से मामूली सहायता के बजाय सीधे प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपए की नुकसानभरपाई देने की मांग की। किसानों का कहना है कि इस वर्ष सूखे ने केवल मौजूदा सीजन की आय को ही प्रभावित नहीं किया है, बल्कि अगले सीजन की तैयारी के लिए भी बड़ा आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है।
पिछले वर्ष की तुलना में बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी का खर्च बढ़ा है। किसानों ने बड़ी लागत लगाकर फसले तैयार की, लेकिन बारिश ने साथ छोड़ दिया और अब उत्पादन ही संकट में आ गया है। ऐसे में अपेक्षित आमदनी मिलने की संभावना बेहद कम होने की जानकारी क्षेत्र के कई किसानों ने दी है।
जिले में खरीफ का सामान्य क्षेत्र करीब 9 लाख 2 हजार हेक्टेयर है। इसमें सोयाबीन और कपास जैसी दो प्रमुख फसलें ही करीब 7.56 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हैं। बारिश में लंबे अंतराल और अपर्याप्त बारिश के कारण इन दोनों फसलों पर गंभीर असर पड़ा है।