यवतमाल जिला पुलिस को डॉक्टरों ने सौंपा ज्ञापन सौ. नवभारत)
Illegal High Power Laser Beams: यवतमाल सार्वजनिक रैली, जुलूस में लेजर लाइट शो और डीजे का बढ़ता चलन आम नागरिकों, विशेषकर युवाओं और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। अत्यंत विचलित करने वाले विषय की गंभीरता को स्पष्ट करने के लिए महाराष्ट्र आयएमए के पर्यावरण समिति उपाध्यक्ष डॉ. विजय कावलकर के नेतृत्व में डाक्टरों के एक प्रतिनिधि मंडल ने यवतमाल जिला पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा।
इस समय डॉ. सुनील अग्रवाल, डॉ सुरेंद्र मूंधड़ा, डॉ राज कडुकार, डॉ. ललित निमोदिया उपस्थित थे। नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार, इन लेजर शो में इस्तेमाल होने वाली लेजर किरणें यदि सीधे आंख पर पड़े, तो वे मात्र 1-2 सेकंड में ‘मैकुलर होल’ या रेटिना को जला सकती है। यह क्षति स्थायी होती है और इसका कोई इलाज संभव नहीं है।
हाल ही में कोल्हापुर और पुणे में जुलूस के दौरान लेजर लाइट के संपर्क में आने से युवाओं की आँखों की रोशनी कम हो गई है। रेजर के कारण हुए कई मामलों में डॉक्टरों ने पाया कि पीड़ितों के रेटिना पर लेजर के कारण स्थायी ‘बनं मार्क्स’ बन गए हैं। तेज ‘डीजे साउंड सिस्टम’ के साथ ‘हाई-इंटेंसिटी लेजर लाइट्स’ का उपयोग एक फैशन बन गया है। जिस पर कार्यवाही अपेक्षित की जा रही है।
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डॉक्टरों ने कहा है कि निर्धारित डेसिबल सीमा से अधिक शोर करने वाले डीजे से न केवल बहरापन, बल्कि हृदय गति का बढ़ना और मिर्गी के दौरों जैसी समस्याएँ भी देखी जा रही हैं। अनेक व्यवसायियों के दुकानों के थरथराने, कांच फूटने की घटना हुई है।
‘हाई पावर लेजर बीम’ के उपयोग को तत्काल प्रभाव से गैर-कानूनी घोषित किया जाए। इनके उपकरणों के आयात और बिक्री के लिए सख्त लाइसेंसिंग प्रणाली लागू की जाने का निवेदन शासन को दिया गया है, इन उपकरणों के लिए अभी कोई मानक संचालन प्रक्रिया नहीं होने से इनका अनियंत्रित स्वरूप अब आम नागरिकों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।