रवींद्र काटोलकर निलंबन (AI Generated Image)
Ravindra Katolkar Suspended: शालार्थ आईडी घोटाले में साइबर पुलिस के शिकंजे में आए यवतमाल के माध्यमिक शिक्षणाधिकारी रवींद्र काटोलकर को आखिरकार 51 दिनों बाद निलंबित कर दिया गया है।उनके निलंबन के आदेश गुरुवार को सीधे मंत्रालय से जारी होकर यवतमाल जिला परिषद में पहुंचे। इस कार्रवाई से जिले में कथित अनियमितताओं में शामिल संस्थाचालकों और संबंधित कार्यालयीन तंत्र में हड़कंप मच गया है।
रवींद्र काटोलकर यवतमाल में शिक्षणाधिकारी बनने से पहले नागपुर में प्राथमिक शिक्षणाधिकारी के पद पर कार्यरत थे। नागपुर में शालार्थ आईडी घोटाले की जांच शुरू होते ही उन्होंने अपना तबादला यवतमाल करा लिया था। नागपुर साइबर पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाते हुए बीते 23 दिसंबर को उन्हें गिरफ्तार कर लिया। वे 48 घंटे से अधिक समय तक पुलिस हिरासत में रहे।
नियमानुसार 48 घंटे से अधिक हिरासत में रहने पर निलंबन की कार्रवाई आवश्यक होने से शिक्षण आयुक्तालय ने उनका प्रस्ताव शासन को भेजा था। इसके बाद गुरुवार (दि। 12) को उनके निलंबन के आदेश जारी कर दिए गए। उपसचिव मो। बा। ताशिलदार के हस्ताक्षर से जारी यह आदेश जिला परिषद कार्यालय में प्राप्त हुआ।
रवींद्र काटोलकर मूल रूप से वर्धा के निवासी हैं। पुलिस ने उन्हें वर्धा स्थित उनके घर से ही गिरफ्तार किया था। आदेशानुसार उन्हें गिरफ्तारी की तारीख से ही निलंबित माना गया है और अगले आदेश तक वे निलंबित रहेंगे।
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निलंबन अवधि में भी उनका मुख्यालय यवतमाल स्थित माध्यमिक शिक्षणाधिकारी कार्यालय ही निर्धारित किया गया है। उन्हें बिना पूर्व अनुमति मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। वर्धा में निवास होने के बावजूद यवतमाल में ही रहना अनिवार्य किए जाने को लेकर चर्चा है कि यह एक प्रकार की ‘प्रशासनिक सजा’ मानी जा रही है।