यवतमाल में बच्चों की सुरक्षा के लिए ‘गुड टच-बैड टच’ जागरूकता पर जोर, पोक्सो कानून के साथ सुरक्षा शिक्षा जरूरी
Yavatmal Child Safety Awareness: बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर देते हुए विशेषज्ञों ने 'गुड टच-बैड टच' शिक्षा और पोक्सो कानून की जानकारी को जरूरी बताया।
- Written By: अंकिता पटेल
बाल सुरक्षा जागरूकता,(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
Yavatmal Good Touch Bad Touch Education: यवतमाल आज के समय में बच्चों की सुरक्षा एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है। कई मामलों में यह सामने आया है कि बच्चों के साथ होने वाला यौन शोषण अक्सर परिचित लोगों द्वारा ही किया जाता है।
ऐसे में बच्चों को खुद की सुरक्षा के लिए ‘गुड टच और बेड टच’ के बारे में जागरूक करना बेहद जरूरी है। यह बात मनोचिकित्सक डॉ. श्रीकांत मेश्राम ने वल्र्ड डे फॉर सेफ्टी के अवसर पर कही।
उन्होंने बताया कि बच्चों पर होने वाले अत्याचार को रोकने के लिए पोक्सो एक्ट एक महत्वपूर्ण कानून है, जिसके तहत यौन शोषण को गंभीर अपराध मानते हुए कड़ी सजा का प्रावधान है। हालांकि, केवल कानून पर्याप्त नहीं है, बल्कि माता-पिता और शिक्षकों को भी बच्चों को छोटी उम्र से ही सुरक्षा के बारे में सिखाना चाहिए।
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डॉ. मेश्राम ने कहा कि बच्चों को सरलभाषा में उनके शरीर के निजी अंगों की जानकारी देना और कौन सा स्पर्श सुरक्षित है तथा कौन सा गलत, यह समझाना जरूरी है। यदि कोई स्पर्श उन्हें असहज लगे, तो तुरंत किसी विश्वसनीय बड़े को बताने की आदत विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने माता-पिता को सलाह दी कि वे बच्चों के साथ विश्वास का रिश्ता बनाएं, उनकी बातें ध्यान से सुनें और उन्हें डांटने के बजाय खुलकर बोलने के लिए प्रोत्साहित करें। बच्चों की सुरक्षा केवल घर तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूल, आसपास के वातावरण और ट्यूशन क्लासेस में भी सतर्कता आवश्यक है।
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बच्चे को सुरक्षित वातावरण दें
यदि किसी बच्चे के साथ अत्याचार होने की आशंका या पुष्टि हो, तो तुरंत उसे सुरक्षित वातावरण दें और बिना संकोच 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन पर जानकारी दें। डॉ. मेश्राम ने समाज और अभिभावकों से बच्चों की सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने की अपील की।
