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आशा स्वयंसेविकाओं ने 2 नवंबर को आयटक के नेतृत्व में शहर के प्रमुख मार्गों से मोर्चा निकालकर जिला स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय तक प्रदर्शन किया।
आशा स्वयंसेविकाओं ने सरकारी कर्मचारी का दर्जा, पर्याप्त वेतन वृद्धि और अन्य सेवा सुविधाएं लागू करने की मांग उठाई।
एक महीने के मानधन के बराबर दिवाली बोनस, लंबित मानधन का भुगतान और हर महीने की 5 तारीख तक मानधन देने की मांग की गई।
Yavatmal ASHA Workers Protest: आशा स्वयं सेविकाओं की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर आयटक, महाराष्ट्र राज्य स्वास्थ्य विभाग आशा एवं गुट प्रवर्तक संगठन की यवतमाल जिला शाखा की ओर से सोमवार, 2 नवंबर को शहर में जोरदार मोर्चा निकाला गया। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए यह मोर्चा जिला स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय पहुंचा।
यहां जिला स्वास्थ्य अधिकारी के साथ आशा स्वयंसेविकाओं की समस्याओं और मांगों पर चर्चा की गई। इसके बाद मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया, आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि आशा स्वयंसेविकाओं को सरकारी कर्मचारियों का दर्जा देकर वेतन एवं अन्य सेवा सुविधाएं लागू की जाएं। उनके मानधन में पर्याप्त वृद्धि की जाए, एक माह के मानधन के बराबर दिवाली बोनस दिया जाए, लंबित मानधन एवं बकाया राशि का तत्काल भुगतान किया जाए तथा हर महीने की 5 तारीख तक मानधन दिया जाए।
इसके साथ ही मानधन में की जाने वाली अन्यायपूर्ण कटौती तत्काल बंद करने की मांग भी की गई। संगठन ने आशा स्वयंसेविकाओं की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने, ग्रेच्युटी एवं ईएसआई का लाभ देने, बीमारी की छुट्टी, वार्षिक आकस्मिक अवकाश तथा छह महीने का सवेतन मातृत्व अवकाश मंजूर करने की मांग उठाई, पात्र आशा स्वयंसेविकाओं को मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना का लाभ पूर्ववत देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
इस मोर्चे में आयटक के कॉ. दिवाकर नागपुरे, विजया आत्राम, सारिका येरमे, सुनीता सोनटक्के, राधाबाई लिखेवार, माया मरस्कोले, माला इंगोले, अल्का राजगडकर, नंदा मुके सहित बड़ी संख्या में आशा स्वयंसेविकाएं उपस्थित थीं।
इसके अलावा क्षयरोग नियंत्रण, आयुष्मान भारत, आभा कार्ड, आरोग्यवर्धिनी केंद्र, आयरन सुक्रोज, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, टीकाकरण सहित विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लंबित प्रोत्साहन भत्ते तत्काल अदा करने की मांग की गई, एएनसी, पीएनसी और प्रसूति संबंधी मामलों में भेदभाव किए बिना सभी को समान मानधन देने, ग्रामीण एवं शहरी आशा स्वयंसेविकाओं के मानधन में अंतर समाप्त करने तथा मोबदले में की जाने वाली अनुचित कटौती बंद करने पर जोर दिया गया।