अकोला में फसल बीमा विवाद की होगी गहन जांच, कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने मांगी रिपोर्ट

Crop Compensation Dispute: अकोला में फसल बीमा मुआवजे में गड़बड़ी पर कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे सख्त। उन्होंने एचडीएफसी एर्गो की तकनीकी कमियों की जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए।
Akola Crop Insurance Investigation
अकोला जिले में खरीफ एवं रबी सीजन के शिकायतों की विस्तृत जांच कर रहे जिलाधिकारी (सोर्स - फोटो नवभारत)
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Akola Crop Insurance Investigation: अकोला जिले में खरीफ एवं रबी सीजन 2023-24 तथा खरीफ सीजन 2024-25 के फसल बीमा मुआवजे को लेकर प्राप्त शिकायतों की विस्तृत जांच कर जिलाधिकारी की रिपोर्ट राज्य सरकार को प्रस्तुत की जाए। साथ ही इस मामले में संभागीय आयुक्त और जिलाधिकारी स्तर पर हुई बैठकों की कार्यवाही (मिनट्स) भी मंगाकर जांच की जाए। यह निर्देश राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने प्रशासन को दिए हैं।

मंत्रालय में आयोजित बैठक में एचडीएफसी एगों इंश्योरेंस कंपनी द्वारा किसानों को फसल बीमा क्षतिपूर्ति भुगतान से संबंधित मुद्दों की समीक्षा की गई। बैठक में श्रम मंत्री आकाश फुंडकर, कृषि राज्य मंत्री एड।

आशीष जायसवाल, विधायक हरीश पिंपले, कृषि विभाग के सचिव परिमल सिंह, कृषि आयुक्त सूरज मांढरे (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से), कृषि संचालक विनयकुमार आवटे, अकोला की जिलाधिकारी वर्षा मीना, फसल बीमा कंपनी के प्रतिनिधि बालासाहब गोपाल तथा भारतीय किसान संघ के प्रांत उपाध्यक्ष राहुल राठी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

किसानों के पक्ष में

उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि इस संबंध में अब तक संभागीय आयुक्त एवं जिलाधिकारी स्तर पर आयोजित बैठकों के विवरण और कार्यवृत्त राज्य सरकार को भेजे जाएं। साथ ही पूरे प्रकरण की गहन जांच कर प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के हित में उचित निर्णय लेने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाए।

कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों के प्रति गंभीर है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पात्र किसानों को फसल बीमा की राशि समय पर प्राप्त हो तथा किसी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

कोई किसान सहायता से वंचित न रहे

बैठक में कृषि मंत्री भरणे ने कहा कि अकोला जिले में खरीफ एवं रबी 2023-24 तथा खरीफ 2024-25 के दौरान फसल बीमा मुआवजा वितरण प्रक्रिया में सामने आई त्रुटियों, किसानों की आपत्तियों और बीमा कंपनी की कार्यप्रणाली की गंभीरता से जांच की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनियों की तकनीकी अड़चनों के कारण किसी भी किसान को सहायता से वंचित नहीं रहना चाहिए।

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