रेल परियोजना (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Railway Tunnel Construction Karli: विदर्भ की अहम वर्धा- यवतमाल-नांदेड़ रेल परियोजना के काम की रफ्तार बेहद धीमी है। वर्ष 2008-09 में शुरु हुई 284 किमी लंबी इस परियोजना में कलंब तक रेल सेवा चालू हो चुकी है, लेकिन इसके आगे का कार्य वर्षों से लंबित है। पर्याप्त निधि, मशीनरी और श्रमिकों की कमी के कारण ट्रैक, पुल और स्टेशन निर्माण की गति प्रभावित हो रही है।
कलंब से यवतमाल के बीच 38 किमी रेलवे ट्रैक प्रस्तावित है, जिसमें कलंब, तलेगांव और यवतमाल स्टेशन शामिल हैं। पहले चरण में वर्धा से कलंब तक 40 किमी कार्य पूरा किया गया था। रेलवे बोर्ड के अनुसार दूसरा चरण 2027 तक पूरा होने की संभावना है, लेकिन इसके लिए कार्य में तेजी लाना जरुरी होगा। फिलहाल कई स्थानों पर खुदाई, मुरुम और मिट्टी भरने का काम अधूरा ही है।
पांढरकवड़ा मार्ग पर कार्ली से बेलोना गांव के पास 2,900 मीटर लंबी सुरंग का निर्माण चल रहा है। अब तक लगभग 500 मीटर कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष हिस्से में कम से कम एक वर्ष लगने की संभावना जताई जा रही है। बारिश के दौरान सुरंग में जमा पानी से काम प्रभावित होता है। रेल मार्ग निर्माण के कारण किसानों को खेतों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। कई स्थानों पर पानी सीधे खेतों में घुसने से नुकसान की शिकायतें हैं।
किसानों ने छोटे पुलों और जलनिकासी नालों की मांग की है, लेकिन रेलवे प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही। भोयर बायपास पर प्रस्तावित यवतमाल रेलवे स्टेशन का निर्माण भी प्रारंभिक अवस्था में है। श्रमिकों और मशीनरी की संख्या कम होने से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा। इसी मार्ग पर फ्लाईओवर का कार्य पिछले दो वर्षों से जारी है, जो अब तक केवल 20 प्रतिशत ही पूरा हुआ है।
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रेलवे विभाग का दावा है कि कलंब से यवतमाल के बीच होने वाले 36 बड़े पुलों में से 30 पुलों का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं, कर्मचारियों के लिए आवासीय कॉलोनियों और प्रशासनिक भवनों का निर्माण अपेक्षाकृत तेज गति से जारी है। कुल मिलाकर इस रेल परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी लाने की जरूरत साफ दिखाई दे रही है।