

Shirpur Police Outpost: यवतमाल जिले के वणी शहर के करीब 100 वर्ष पुराने पुलिस स्टेशन, शिरपुर पुलिस चौकी और पुलिस आवास अब खस्ताहाल होकर हादसे को न्योता देते नजर आ रहे हैं। बरसों पुरानी इन इमारतों की जर्जर स्थिति को देखते हुए अब इनके स्थान पर आधुनिक प्रशासनिक भवन और आवासीय परिसर के निर्माण की मांग जोर पकड़ने लगी है। इस संबंध में पूर्व जिला परिषद सदस्य विजय पिदुरकर ने बल्लारपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुधीर मुनगंटीवार को ज्ञापन सौंपकर शासन स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया है कि वणी पुलिस स्टेशन और शिरपुर पुलिस चौकी की इमारतें अपनी आयु पूरी कर चुकी हैं। बरसात के दिनों में छत से लगातार पानी टपकता है, दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें उभर आई हैं और कई हिस्सों का प्लास्टर भी झड़ चुका है। ऐसी स्थिति में भवन कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। इसके बावजूद पुलिस अधिकारी और कर्मचारी इन्हीं असुरक्षित इमारतों में अपनी जिम्मेदारियां निभाने को मजबूर हैं।
विजय पिदुरकर ने बताया कि वर्ष 2017 में नए भवन का प्रस्ताव तैयार किया गया था, जबकि 2023 में पुलिस विभाग ने संशोधित भवन नक्शा भी तैयार किया, लेकिन आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। वर्षों से फाइलें आगे बढ़ने का इंतजार कर रही हैं, जिससे पुलिस विभाग को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस कर्मियों के लिए उपलब्ध सरकारी आवासों की संख्या भी बेहद कम है। पर्याप्त क्वार्टर नहीं होने के कारण अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी निजी मकानों में रहने को विवश हैं, जिससे उन्हें आर्थिक और प्रशासनिक दोनों प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
वणी क्षेत्र में कोयला खदानों, औद्योगिक परियोजनाओं, व्यावसायिक गतिविधियों और लगातार बढ़ती आबादी के कारण कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। इसके बावजूद पुलिस विभाग आज भी करीब 100 वर्ष पुरानी जर्जर इमारतों में काम करने को मजबूर है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक पुलिसिंग के लिए सुरक्षित भवन, डिजिटल सुविधाओं से युक्त कार्यालय, ने पर्याप्त रिकॉर्ड कक्ष, महिला सहायता कक्ष और कर्मचारियों के लिए आवास आवश्यक हैं। ऐसे में नए पुलिस भवन का निर्माण केवल सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा और बेहतर कानून-व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
वणी में 52 पुलिसकर्मियों के आवास और 4 अधिकारियों के क्वार्टर, यानी कुल 56 सरकारी मकान आज जर्जर होकर खतरे का पर्याय बन चुके हैं। बरसात में छतों से पानी टपकने पर कई परिवार तिरपाल और मेनकपड़े के सहारे रहने को मजबूर हैं। हैरानी की बात यह है कि वर्षों पहले 76 आधुनिक आवासों के निर्माण को मंजूरी मिल चुकी थी, जिनमें खेल मैदान, बगीचा और अन्य सुविधाओं की भी योजना थी, लेकिन निर्माण आज तक शुरू नहीं हुआ। जान जोखिम में डालकर कानून-व्यवस्था संभालने वाले पुलिसकर्मी अब सुरक्षित आवास के लिए तत्काल निर्माण शुरू करने की मांग कर रहे हैं।