यवतमाल न्यूज
Rangnath Swami Yatra Wani 2026: वणी स्थानीय नगर परिषद क्षेत्र में आयोजित होने वाली प्रसिद्ध रंगनाथ स्वामी यात्रा की निविदा प्रक्रिया को लेकर बड़ा घोटाला सामने आने का दावा किया जा रहा है। नागपुर के एक ठेकेदार द्वारा जिला अधिकारी को दी गई शिकायत के बाद पूरे शहर में सनसनी फैल गई है। आरोप है कि अधिक राशि की पेशकश होने के बावजूद कम रकम की निविदा को मंजूरी देकर नगर परिषद को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार वणी नगर परिषद ने 20 फरवरी को एक समाचार पत्र में रंगनाथ स्वामी यात्रा के लिए निविदा प्रकाशित की थी। इस निविदा प्रक्रिया में तीन अम्यूजमेंट पार्क संचालकों ने भाग लिया था।
इनमें सबसे अधिक बोली नागपुर के अश्मीर अम्यूजमेंट पार्क के संचालक हर्षद भाटी ने 6 लाख 31 हजार रुपये की लगाई थी। दूसरी बोली यवतमाल के पूजा अम्यूजमेंट पार्क के संचालक आनंद भेले की 6 लाख रुपये तथा तीसरी बोली नागपुर के लक्ष्मी अम्यूजमेंट पार्क के संचालक प्रवीण गोस्वामी की 5 लाख रुपये थी, शिकायतकर्ता का आरोप है कि सबसे अधिक बोली लगाने के बावजूद उन्हें ठेका देने में बाधाएं उत्पन्न की गईं।
शिकायत के अनुसार नगर परिषद के कुछ पदाधिकारियों ने उन्हें उपाध्यक्ष के कार्यालय में बुलाकर स्पष्ट कहा कि इस दर पर यात्रा का ठेका नहीं दिया जाएगा और इसके लिए अतिरिक्त रकम देनी होगी। आरोप है कि बाद में 10 लाख रुपये की राशि पर सहमति भी बन गई और ठेकेदार ने यह रकम देने की तैयारी भी जता दी थी। हालांकि इसके बाद घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया।
शिकायत में बताया गया है कि उस समय मुख्य अधिकारी के छुट्टी पर होने का हवाला देकर रकम लेने से मना कर दिया गया और अगले दिन आने को कहा गया। लेकिन इसी बीच 11 मार्च को एक छोटे समाचार पत्र में अचानक दोबारा निविदा प्रकाशित कर दी गई और उसी दिन दोपहर 2 बजे तक निविदा जमा करने की समय सीमा तय कर दी गई।
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चौंकाने वाली बात यह रही कि दूसरी बार निकाली गई निविदा में केवल एक ही प्रस्ताव प्राप्त हुआ, जो पूजा अम्यूजमेंट पार्क, यवतमाल के संचालक आनंद भेले का था। उसी दिन निविदा खोलकर 7 लाख 51 हजार रुपये की बोली को मंजूरी भी दे दी गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब वह 10 लाख रुपये तक देने को तैयार था, तब कम राशि की निविदा को मंजूरी देना गंभीर अनियमितता और नगर परिषद को आर्थिक नुकसान पहुंचाने जैसा है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाली यात्रा की निविदा प्रक्रिया में भी इस तरह की गड़बड़ी सामने आ रही है, तो यह बेहद गंभीर मामला है। लोगों ने प्रशासन से निविदा प्रक्रिया की पूरी फाइल सार्वजनिक करने और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके। अब पूरे शहर की नजर जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है, क्योंकि यह मामला केवल एक ठेके का नहीं बल्कि नगर परिषद की विश्वसनीयता और पारदर्शिता से भी जुड़ गया है।