क्या बदलेंगे वणी के समीकरण? विधायक देरकर-उंबरकर ने की साथ चुनाव लड़ने की घोषणा
उद्धव और राज ठाकरे के एक साथ आने के बाद अब ऐसा प्रतीत हो रहा कि जल्द ही यवतमाल में राजनीतिक समीकरण बदलने वाले है। यवतमाल में दो गुटों ने एक साथ चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है।
- Written By: प्रिया जैस
राजू उंबरकर और संजय देरकर (सौजन्य-सोशल मीडिया)
वणी: यवतमाल के वणी क्षेत्र में शहरी भागों में मनसे की पकड़ मानी जाती है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की मजबूत पकड़ है। अब ये दोनों ताकतें एकजुट होकर मैदान में उतरेंगी, जिससे अन्य राजनीतिक दलों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। वणी के विधायक संजय देरकर और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के तेजतर्रार नेता राजू उंबरकर ने मंच से घोषणा की कि वे आगामी विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ेंगे।
यह घोषणा न केवल वणी विधानसभा बल्कि पूरे यवतमाल जिले की राजनीति के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। वणी पालिका पर इससे पहले मनसे और शिवसेना की पकड़ रही है। ऐसे में यह गठबंधन स्थानीय स्तर पर भी गहरी छाप छोड़ सकता है। इस संयुक्त निर्णय के बाद शिवसैनिकों और मनसे कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। समर्थकों ने इस कदम को “मराठी एकता का नया युग” बताया है।
राज और उद्धव का वर्ली डोम में विजय मोर्चा
वर्ली डोम में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पहली बार सार्वजनिक रूप से एक मंच पर आए। दोनों ने मराठी अस्मिता की रक्षा के लिए मिलकर काम करने की प्रतिज्ञा ली। इस ऐतिहासिक क्षण को महाराष्ट्र भर से आए मराठी जनों ने साक्षी रूप में देखा और सराहना की। मुंबई के वर्ली डोम में आयोजित ऐतिहासिक मिलन (महासभा) ने मराठी अस्मिता की गूंज पूरे महाराष्ट्र में फैलाई है। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की एकजुटता ने राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू कर दिया है। इसी पृष्ठभूमि में वणी विधानसभा क्षेत्र की राजनीति भी तेजी से करवट बदलती नजर आ रही है।
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क्या कहता है जनमानस?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन सिर्फ विधानसभा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह स्थानीय निकाय चुनावों तक भी विस्तारित हो सकता है। इससे वणी समेत यवतमाल जिले की राजनीति में गहमा-गहमी और प्रतिस्पर्धा और अधिक बढ़ने की संभावना है। वणी शहर और ग्रामीण भागों में विधायक देरकर – उंबरकर की इस एकजुटता को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। समर्थकों का मानना है कि यदि यह गठबंधन मैदान में उतरा तो वणी की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
