यवतमाल में शिक्षकों की कमी पर शिवसेना (UBT) आक्रामक, जिला प्रशासन को दिया 2 अगस्त तक का अल्टीमेटम
Yavatmal ZP News: वणी, मारेगांव और झरी-जामणी तहसील के जिला परिषद स्कूलों में 300 शिक्षकों के पद खाली होने पर शिवसेना (UBT) ने मोर्चा खोला है। नियुक्तियां न होने पर 2 अगस्त से आंदोलन की चेतावनी दी है।
- Written By: केतकी मोडक
यवतमाल जिला परिषद फाईल फोटो (सोर्स- सोशल मीडिया)
Yavatmal Zilla Parishad Teacher Shortage: यवतमाल जिले के वणी, मारेगांव और झरी-जामणी तहसील के जिला परिषद स्कूलों में करीब 300 शिक्षकों के पद रिक्त होने से हजारों ग्रामीण और आदिवासी विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कड़ा अल्टीमेटम जारी किया है। पार्टी ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 2 अगस्त तक रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई, तो छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों के साथ कलेक्टर एवं जिला परिषद कार्यालय परिसर में ही स्कूल लगाकर आंदोलन किया जाएगा।
ज्ञापन में उठाए गए गंभीर मुद्दे
शिवसेना के यवतमाल जिला प्रमुख संजय निखाडे के नेतृत्व में जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि वणी, मारेगांव और झरी-जामणी के अनेक जिला परिषद स्कूल आज केवल एक या दो शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। ऐसे में एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं का शैक्षणिक दायित्व निभाना पड़ रहा है, जिससे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना लगभग असंभव हो गया है।
शिवसेना ने आरोप लगाया कि पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे स्कूलों के शिक्षकों पर बीएलओ, एसआईआर, जनगणना, चुनाव और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों का अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया है। इससे नियमित पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है और सबसे अधिक नुकसान गरीब तथा आदिवासी विद्यार्थियों का हो रहा है। ज्ञापन में प्रशासन से तीखा सवाल किया गया है कि जब निजी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराए जा सकते हैं, तो ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के गरीब बच्चों को शिक्षकविहीन शिक्षा क्यों दी जा रही है?
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शिवसेना ने इसे शिक्षा के अधिकार के साथ अन्याय बताते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है। पार्टी ने प्रशासन से मांग की है कि सभी रिक्त शिक्षक पदों पर तत्काल नियुक्तियां की जाएं, एक या दो शिक्षकों वाले स्कूलों के शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाए, दुर्गम और आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों में प्राथमिकता के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति की जाए।
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शिक्षक कमी को लेकर राजनीतिक माहौल भी गरमा गया
ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बढ़ती शिक्षक कमी को लेकर अब राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। ऐसे में सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह समय रहते शिक्षकों की नियुक्ति कर विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करता है या फिर 2 अगस्त के बाद यह मुद्दा बड़े जन-आंदोलन का रूप लेता है।
