'जो गरजते हैं, वो बरसते नहीं', उद्धव ठाकरे के दौरे पर यवतमाल के पालकमंत्री संजय राठौड़ का पलटवार

Yavatmal Sanjay Rathod: यवतमाल में संजय राठौड़ ने ऑपरेशन तुडवा पर उद्धव ठाकरे को जवाब देते हुए कहा कि उनकी पार्टी आलोचना नहीं, विकास कार्यों से जवाब देती है व शिवसेना का जनाधार लगातार बढ़ रहा है।
"Those who thunder do not rain"—Yavatmal Guardian Minister Sanjay Rathod hits back at Uddhav Thackeray's visit.
संजय राठौड़, (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Yavatmal Operation Todwa: महाराष्ट्र सरकार के मंत्री Maharashtra Politicsएवं यवतमाल के पालकमंत्री संजय राठौड़ ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे के यवतमाल दौरे और कथित 'ऑपरेशन तुडवा' को लेकर हो रही राजनीतिक बयानबाजी पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक धमकियों या आरोपों का जवाब उनकी पार्टी शब्दों से नहीं, बल्कि विकास कार्यों से देगी।

राठौड़ ने कहा, "जो गरजते हैं, वो बरसते नहीं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई कितना भी आरोप लगाए या राजनीतिक बयानबाजी करे, उनकी पार्टी जनता के हित में किए जा रहे कार्यों पर ही ध्यान केंद्रित रखेगी। उनके अनुसार विरोधियों की आलोचना का जवाब देने में समय गंवाने के बजाय सरकार विकास योजनाओं को गति देने का काम कर रही है।

40 से बढ़कर 60 विधायक हुए

संजय राठौड़ ने शिवसेना में हुए राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि जब पार्टी में 40 विधायकों ने अलग रास्ता अपनाया था, तब विरोधियों ने तरह-तरह की बातें की थीं, लेकिन आज उनकी संख्या बढ़कर 60 तक पहुंच चुकी है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी का जनाधार लगातार मजबूत हो रहा है और आने वाले समय में इसमें और विस्तार होगा।

बालासाहेब के विचारों से जुड़ रहे लोग

राठौड़ ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे के विचारों में विश्वास रखने वाले अनेक नेता और कार्यकर्ता पार्टी से जुड़ने के इच्छुक हैं। उन्होंने दावा किया कि निकट भविष्य में कई बड़े राजनीतिक चेहरे और कार्यकर्ता शिवसेना में शामिल होंगे, जिससे संगठन और अधिक मजबूत होगा।

विकास कार्यों से देंगे जवाब

पालकमंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी का उद्देश्य राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझना नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रही है और भविष्य में भी इसी दिशा में कार्य करती रहेगी। उन्होंने दोहराया कि जनता के बीच किए गए काम ही किसी भी राजनीतिक आलोचना का सबसे प्रभावी जवाब होते हैं।

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