

Takli Dolhari Project: यवतमाल जिले के दारव्हा तालुका के टाकली-डोल्हारी परियोजना के तहत मौजा फुबगांव के पुनर्वास का मामला एक बार फिर गरमा गया है ग्रामीणों ने प्रशासन से सात दिनों के भीतर विशेष ग्रामसभा बुलाकर पुनर्वास के संबंध में निर्णय लेने की मांग की है इस संबंध में फुबगांव के नागरिकों ने पंचायत समिति के समूह विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
फुबगांव के पुनर्वास की प्रक्रिया पिछले कई वर्षों से लंबित है पुनर्वास के संबंध में ग्रामीणों की राय और सहमति आधिकारिक रूप से दर्ज करने के लिए फुबगांव में विशेष ग्रामसभा आयोजित करना आवश्यक है ग्रामसभा में फुबगांव के पुनर्वास को दारव्हा में करने के संबंध में आवश्यक कार्यवाही की जाए ऐसी मांग ग्रामीणों ने की है।
ग्रामीणों ने पुनर्वास प्रक्रिया की वैधता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। यदि फुबगांव पुनर्वास प्रकरण वर्ष 2021 में समाप्त (लैप्स) हो गया था तो इसके बाद भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास कानून के तहत नए सिरे से प्रक्रिया शुरू की गई है या नहीं इसकी जानकारी प्रशासन से मांगी गई है।
साथ ही ग्रामसभा के प्रस्ताव के आधार पर पुनर्वास स्थल को मंजूरी दी गई है या नहीं तथा पुनर्वास किस प्रस्ताव के आधार पर तय किया गया इसे स्पष्ट करने की मांग की गई है। प्रशासन ने मांगों की अनदेखी की तो फुबगांव, उदापुर और घनापुर इन तीन गांवों के पुनर्वास के मुद्दे को लेकर आंदोलन और अनशन का रास्ता अपनाना पड़ेगा, ऐसी चेतावनी ग्रामीणों ने दी है।
ग्रामीणों का दावा है कि दारव्हा स्थित बैरागी बुवा मठ परिसर में फुबगांव पुनर्वास की कार्रवाई शुरू है ग्रामीणों ने इसे तत्काल रोककर कानून के अनुसार तथा ग्रामस्थों को विश्वास में लेकर नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
इसके अलावा भविष्य में पुनर्वास को लेकर कोई समीक्षा बैठक आयोजित की जाती है तो संघर्ष समिति ग्राम पंचायत और संबंधित नागरिकों को कम से कम सात दिन पहले लिखित सूचना देने की मांग की गई है ग्राम पंचायत कार्यालय में सूचना करने के साथ ही दवंडी देकर भी ग्रामीणों को बैठक की जानकारी देने की मांग की गई है।