

Takalghat Sarpanch Disqualified: नागपुर जिले की प्रमुख ग्राम पंचायतों में शामिल टाकलघाट ग्राम पंचायत की सरपंच शारदा ज्ञानेश्वर शिंगारे को आर्थिक व्यवहारों में अनियमितता के मामले में ग्राम पंचायत सदस्य और सरपंच पद के लिए अपात्र घोषित किया गया है।
अपर विभागीय आयुक्त, नागपुर विभाग के न्यायासन ने 21 सितंबर 2026 को यह आदेश पारित किया। साथ ही ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ नियमानुसार प्रशासनिक कार्रवाई करने के निर्देश मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद नागपुर को दिए गए हैं। टाकलघाट ग्राम पंचायत के उपसरपंच उमेश नथ्थु कावले ने ग्राम पंचायत के कामकाज और आर्थिक व्यवहारों को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में ग्राम पंचायत निधि के उपयोग, मजदूरों को नकद मजदूरी का भुगतान, विकास कार्यों से संबंधित देयकों तथा शासन के आर्थिक नियमों के पालन में अनियमितता के आरोप लगाए गए थे। प्रकरण की जांच के दौरान विभिन्न विकास कार्यों में लगे मजदूरों को उनके बैंक खातों में राशि जमा करने के बजाय नकद मजदूरी दिए जाने की बात सामने आने का उल्लेख आदेश में किया गया है।
वरिष्ठ कार्यालयों की ओर से मजदूरी सीधे मजदूरों के बैंक खातों में जमा करने के निर्देश होने के बावजूद नकद भुगतान किए जाने को गंभीरता से लिया गया। इसके अलावा 15वें वित्त आयोग की निधि से मजदूरी की राशि संबंधित मजदूरों के नाम के बजाय निविदाधारक के नाम पर अदा किए जाने की बात भी आदेश में दर्ज है।
आदेश में कहा गया है कि ग्राम पंचायत के आर्थिक व्यवहारों में सरपंच और सचिव की संयुक्त जिम्मेदारी होती है। ग्राम पंचायत निधि का उचित उपयोग, आर्थिक अभिलेखों का रखरखाव तथा शासन की योजनाओं की निधि नियमानुसार खर्च हो रही है या नहीं, इसकी निगरानी संबंधित पदाधिकारियों की जिम्मेदारी है।
इस मामले में मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नागपुर जिला परिषद की ओर से प्रस्तुत जांच रिपोर्ट से अपर विभागीय आयुक्त के न्यायासन ने सहमति जताई। इसके बाद शिकायत आवेदन मंजूर करते हुए शारदा ज्ञानेश्वर शिंगारे को टाकलघाट ग्राम पंचायत के सदस्य और सरपंच पद पर आगामी अवधि के लिए बने रहने के लिए अपात्र घोषित किया गया।
इस बीच, अपने बचाव में सरपंच शारदा ज्ञानेश्वर शिगारे ने कई आर्थिक व्यवहार ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के अनुसार किए जाने, मजदूरों को प्रत्यक्ष कार्य के आधार पर मजदूरी दिए जाने तथा ग्राम पंचायत को किसी प्रकार का आर्थिक नुकसान नहीं होने की बात कही थी।
हालांकि उपलब्ध अभिलेख, जांच रिपोर्ट और संबंधित नियमों पर विचार करने के बाद न्यायासन ने शिकायत आवेदन मंजूर कर लिया। इस आदेश के बाद नागपुर जिले की प्रमुख टाकलघाट ग्राम पंचायत के कामकाज को लेकर चर्चा तेज हो गई है। साथ ही ग्राम पंचायत निधि के उपयोग, आर्थिक व्यवहारों में पारदर्शिता और पदाधिकारियों की जवाबदेही को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।