

Indrayani River Project Land Acquisition Work Order Delay: पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका (मनपा) द्वारा शुरू की गई इंद्रायणी नदी पुनरुज्जीवन परियोजना अपनी शुरुआती चरण से ही प्रशासनिक लापरवाही के घेरे में आ गई है। परियोजना के लिए आवश्यक 100 प्रतिशत जमीन का अधिग्रहण पूरा किए बिना ही मनपा ने जुलाई महीने में ठेकेदार को कार्य आदेश (वर्क ऑर्डर) जारी कर दिया। अब वर्क ऑर्डर देने के बाद प्रशासन को जमीन अधिग्रहण और भूमि की सीमा नापने (हद की माप) की कवायद शुरू करनी पड़ रही है, जिसके खर्च की मंजूरी का प्रस्ताव स्थायी समिति के समक्ष रखा गया है।
पिंपरी-चिंचवड़ शहर की सीमा में इंद्रायणी नदी का लगभग 18.80 किलोमीटर लंबा प्रवाह क्षेत्र आता है, जो नालों और बिना उपचारित सीवेज के कारण बुरी तरह प्रदूषित हो चुका है। नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार के 'अमृत 2.0' (Amrut 2.0) अभियान के तहत ₹430 करोड़ की यह योजना मंजूर की गई है।
नियमों के अनुसार, वर्क ऑर्डर मिलने के बाद ठेकेदार को तीन साल के भीतर काम पूरा करना अनिवार्य है। इस परियोजना के कुल खर्च का 50 प्रतिशत हिस्सा केंद्र और राज्य सरकार अनुदान के रूप में देगी, जबकि शेष 50 प्रतिशत खर्च मनपा को वहन करना होगा। हालांकि, विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के चलते पुणे जिले में लागू आचार संहिता के कारण अधिग्रहण और भूमि माप की यह प्रक्रिया करीब एक महीने आगे खिसकने की आशंका जताई जा रही है।
मामले पर सफाई देते हुए पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका के अतिरिक्त आयुक्त विक्रांत बगाडे ने बताया कि परियोजना के लिए आवश्यक अधिकांश जमीन का अधिग्रहण पहले ही किया जा चुका है। केवल कुछ विशिष्ट हिस्सों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया बाकी है, जिसका प्रस्ताव जल्द ही जिलाधिकारी कार्यालय को भेजा जा रहा है। हालांकि, पर्यावरणप्रेमियों और नागरिकों का सवाल है कि जब पूरी जमीन कब्जे में ही नहीं थी, तो वर्क ऑर्डर जारी करने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई।