यवतमाल में 70,000 से अधिक काम ठप! मनरेगा कर्मचारियों की हड़ताल से किसान और मजदूर बेहाल

MGNREGA Strike Maharashtra: मनरेगा संविदा कर्मचारियों का आजाद मैदान में अन्नत्याग आंदोलन। यवतमाल में 70,000 से अधिक काम ठप। शासकीय सेवा में समाहित करने की प्रमुख मांग।
MGNREGA contract employees on hunger strike at Azad Maidan, Mumbai. Over 70,000 works halted in Yavatmal. Demand for permanent government service.
मनरेगा कर्मचारियों की हड़ताल (सौजन्य-नवभारत)
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Azad Maidan Protest: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत कार्यरत सभी संविदा कर्मचारी और अधिकारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर काम बंद आंदोलन शुरू कर दिया है। इसके चलते जिले में मनरेगा के अंतर्गत चल रहे विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं।

आंदोलनकारी कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि मनरेगा के अंतर्गत कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अन्य संविदा कर्मचारियों की तरह शासकीय सेवा में समाहित किया जाए। साथ ही, मनरेगा अंतर्गत अधिकारियों और कर्मचारियों की किसी कंपनी के माध्यम से की जाने वाली भर्ती प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।

कर्मचारियों की मांग

कर्मचारियों का कहना है कि राज्य निधि एसोसिएशन के माध्यम से नियुक्ति देकर “समान काम, समान वेतन” नीति लागू की जाए। इसके अलावा अन्य विभागों की तरह मनरेगा विभाग की स्वतंत्र यंत्रणा तैयार कर पदानुसार आकृतिबंध (स्ट्रक्चर) बनाया जाए। मनरेगा के संविदा कर्मचारी और अधिकारी 1 फरवरी से मुंबई के आजाद मैदान में श्रृंखलाबद्ध अनशन और अन्नत्याग आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन को छह से सात दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं निकला है, जिससे जिले में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। राज्य के विभिन्न जिलों में मनरेगा के अंतर्गत राज्य समन्वयक, तकनीकी सहायक, सहायक कार्यक्रम अधिकारी, क्लर्क-कम-डाटा ऑपरेटर और चपरासी आदि कर्मचारी संविदा पद्धति से कार्य कर रहे हैं।

6 फरवरी से शुरू किया अन्नत्याग आंदोलन

कर्मचारियों ने सवाल उठाया है कि जब राज्य सरकार अन्य विभागों के संविदा कर्मचारियों को शासकीय सेवा में समाहित कर रही है, तो मनरेगा में कार्यरत कर्मचारियों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है। मुंबई के आजाद मैदान में विभिन्न जिलों से पहुंचे कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर एकजुट होकर आंदोलन कर रहे हैं। 23 से 26 जनवरी तक काली पट्टी बांधकर लेखनी बंद आंदोलन किया गया।

27 से 31 जनवरी तक पूर्ण काम बंद आंदोलन किया गया। 2 से 5 फरवरी तक आजाद मैदान में धरना आंदोलन किया गया और 6 फरवरी से अन्नत्याग आंदोलन शुरू किया गया है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि मांगें पूरी होने तक वे पीछे नहीं हटेंगे। इस आंदोलन का असर ग्रामीण क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। मनरेगा की ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया, मस्टर रोल तैयार करना, भुगतान प्रक्रिया और अन्य प्रबंधन कार्य बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

जिले में 70,156 कार्य प्रभावित

यवतमाल जिले में मनरेगा के अंतर्गत पिछले 15 दिनों से लगभग 70,156 कार्य लंबित पड़े हैं। इनमें सिंचन कुएं, पशु शेड, पगडंडी सडके, घरकुल और वृक्षारोपण जैसे कार्य शामिल हैं। वर्तमान समय काम का मुख्य सीजन होने के कारण ग्रामीण विकास की इस महत्वपूर्ण योजना पर गंभीर असर पड़ा है। कर्मचारियों की हड़ताल से ग्रामीण विकास की रीढ़ मानी जाने वाली यह योजना लगभग ठप हो गई है।

आंदोलन स्थल पर पहुंचे विधायक मांगुलकर

यवतमाल के विधायक बालासाहब मांगुलकर ने मुंबई के आजाद मैदान पहुंचकर आंदोलनकारियों से मुलाकात की। उन्होंने कर्मचारियों की मांगों को विधानसभा अधिवेशन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से उठाने का आश्वासन दिया है।

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