TET में फेल शिक्षक बैठेंगे घर? महाराष्ट्र शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप, यवतमाल से दिल्ली तक हलचल तेज
Teacher Eligibility Test: महाराष्ट्र में सभी प्राथमिक शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षा विभाग जुटा रहा आंकड़े। टीईटी विहीन शिक्षकों पर संकट।
- Written By: प्रिया जैस
टीईटी (सौजन्य-सोशल मीडिया)
TET Mandatory News Maharashtra: सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार यदि टीईटी (Teacher Eligibility Test) को सख्ती से लागू किया गया, तो कितने शिक्षकों को घर बैठना पड़ेगा और उससे शिक्षा क्षेत्र में कितनी बड़ी कर्मचारी कमी पैदा होगी, इसका आकलन केंद्र सरकार ने शुरू कर दिया है। इसके लिए शिक्षा विभाग द्वारा जिलेवार आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं।
अगले दो दिनों में यह जानकारी शिक्षा संचालकों के पास भेजी जाएगी और वहां से केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय तक पहुंचेगी। इसके बाद टीईटी विहीन शिक्षकों की स्थिति के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। शिक्षक नियुक्ति के लिए आवश्यक पात्रता के मानदंड एनसीटीई (राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद) द्वारा तय किए जाते हैं। एनसीटीई ने प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए टीईटी परीक्षा अनिवार्य की है।
2011 में जारी की अधिसूचना
इसकी अधिसूचना वर्ष 2011 में जारी की गई थी। इसके बाद देशभर में सीटीईटी और महाराष्ट्र में एमएचटीईटी परीक्षा का हर वर्ष आयोजन किया जा रहा है। इसके बावजूद महाराष्ट्र में अब भी हजारों प्राथमिक शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है। इसी बीच सर्वोच्च न्यायालय ने 1 सितंबर 2025 को एक और कठोर निर्णय दिया।
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इसके अनुसार देश के सभी प्राथमिक शिक्षकों को दो वर्षों के भीतर टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। वर्ष 2011 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए भी अब टीईटी अनिवार्य कर दी गई है। जो शिक्षक दो वर्षों के भीतर टीईटी उत्तीर्ण नहीं करेंगे, उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के निर्देश न्यायालय ने दिए हैं। इस फैसले के बाद महाराष्ट्र के शिक्षक वर्ग में हड़कंप मच गया है।
गंभीरता से नहीं ले रहा शिक्षा मंत्रालय
सरकार द्वारा इस निर्णय पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाए, ऐसी मांग लगातार की जा रही है। बीते दो महीनों में शिक्षक संगठनों द्वारा कई बार आंदोलन भी किए गए हैं। अब स्वयं केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इस विषय को गंभीरता से लिया है। महाराष्ट्र में कितने शिक्षक टीईटी न होने के कारण नौकरी से बाहर हो सकते हैं, और क्या उनके लिए कोई मध्य मार्ग निकाला जा सकता है।
इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है। इसके तहत शिक्षा संचालक शरद गोसावी ने यवतमाल सहित सभी जिलों से दो दिनों में विस्तृत आंकड़े मंगवाए हैं। जिले में टीईटी विहीन शिक्षकों की संख्या काफी अधिक है, जिससे इस आदेश के बाद कई शिक्षकों के मन में गहरी चिंता पैदा हो गई है।
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आंकड़े से लगाया जाएगा अनुमान
- जिले में कुल प्राथमिक शिक्षक कितने हैं?
- उनमें से 2011 से पहले नियुक्त शिक्षक कितने?
- 2011 के बाद नियुक्त शिक्षक कितने?
- 2011 से पहले नियुक्त होकर बाद में टीईटी पास करने वाले शिक्षक
- 2011 के बाद नियुक्त एवं टीईटी उत्तीर्ण शिक्षक
- टीईटी की अनिवार्यता से छूट पाने योग्य शिक्षक कितने?
हां, केंद्र सरकार के निर्देशानुसार संचालकों ने हमसे जानकारी मांगी है। पंचायत समिति स्तर से टीईटी उत्तीर्ण तथा टीईटी विहीन शिक्षकों की जानकारी एकत्र की जा रही है। यह जानकारी संचालकों को भेजी जाएगी, वहां से राज्य की समेकित रिपोर्ट केंद्र सरकार को जाएगी और फिर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
- प्रकाश मिश्रा, प्राथमिक शिक्षा अधिकारी, यवतमाल
टीईटी के परिणाम पर टिकी नजरें
सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद एक टीईटी परीक्षा आयोजित की जा चुकी है और परीक्षा परिषद ने उसकी अंतिम उत्तर कुंजी भी जारी कर दी है। इसके आधार पर जिले के कई शिक्षकों को अपने उत्तीर्ण या अनुत्तीर्ण होने का अंदाजा लग चुका है। अब अंतिम परिणाम कब घोषित होगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। वहीं उत्तर कुंजी में एक उत्तर गलत पाए जाने पर परीक्षा परिषद ने इस संबंध में स्पष्टीकरण भी जारी किया है।
