कृषि मंडी (सौजन्य-नवभारत)
Mahagaon Mandi Committee: महागांव कृषि उपज मंडी समिति के समक्ष 15 दिसंबर को राष्ट्रीय किसान मोर्चा के तहसील अध्यक्ष प्रमोद जाधव के नेतृत्व में धरना आंदोलन किया गया था। इस दौरान आंदोलनकारियों ने मंडी समिति के सचिव से वर्ष 2020-21 से 2025-26 तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) कानून के अंतर्गत कितनी कृषि उपज की खरीदी की गई, तथा जिन व्यापारियों ने एमएसपी पर खरीदी नहीं की।
उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई इसका लिखित विवरण मांगा था। इस पर मंडी समिति के सचिव द्वारा दिया गया उत्तर किसानों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा बताया जा रहा है। सचिव के अनुसार, कृषि उपज मंडी समिति द्वारा अब तक किसी भी प्रकार से एमएसपी पर कृषि उपज की खरीदी नहीं की गई है। हिवरा, काली (दौ), फुलसावंगी, महागांव, मुडाणा आदि स्थानों पर किसानों की उपज व्यापारियों द्वारा खरीदी जाती है।
संबंधित व्यापारियों को केवल एमएसपी पर खरीदी करने की नोटिस दी जाती है, किंतु आज तक किसी भी व्यापारी पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। इसके अलावा, न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दर पर हो रहे कृषि उपज के लेन-देन को रोकने के लिए भी कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं।
मंडी समिति के उपबाजार फुलसावंगी, काली (दौ) और हिवरा यार्ड में वर्ष 2015-16 में नीलामी शुरू करने का प्रयास किया गया था। इसी तरह 2018-19 में भी नीलामी के प्रयास हुए, लेकिन समिति को सफलता नहीं मिली।
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प्रमोद जाधव ने आरोप लगाया कि मंडी समिति के सचिव द्वारा कृषि उपज विपणन अधिनियम 1963 की धारा 32(घ) का जानबूझकर उल्लंघन किया गया है। वास्तव में विपणन महामंडल, जिला प्रशासन और कृषि उपज मंडी समिति-इन तीनों की जिम्मेदारी है कि किसानों की उपज निर्धारित एमएसपी पर खरीदी जाए, लेकिन व्यवहार में ऐसा होता नहीं दिख रहा है।
कानूनों का उल्लंघन करने वाले संबंधित विभागों के खिलाफ शीघ्र ही वरिष्ठ अधिकारियों के पास राष्ट्रीय किसान मोर्चा की ओर से शिकायत दर्ज कराई जाएगी यह जानकारी राष्ट्रीय किसान मोर्चा के तहसील अध्यक्ष प्रमोद जाधव ने दी।