लाडकी बहिन योजना (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Ladki Bahin Yojna News: राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिण’ योजना को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जुलाई 2024 से प्रत्येक परिवार की दो महिलाओं को प्रतिमाह 1500 रुपये देने का वादा कर सरकार ने राजनीतिक लाभ तो उठा लिया, लेकिन जुलाई 2025 से केवाईसी के बहाने पात्र महिलाओं को ही ‘बोगस’ बताकर योजना से बाहर करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
इससे महिलाओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। महिलाओं का आरोप है कि सरकार ने ‘जरूरत खत्म, तो लाड़ली भी खत्म’ जैसी नीति अपनाई है। चुनाव तक जो महिलाएं सरकार की लाड़की थीं, चुनाव समाप्त होते ही उन्हें पराया बना दिया गया। कई परिवारों में जहां दो महिलाएं पात्र हैं, हां एक या दोनों को बिना स्पष्ट कारण योजना से वंचित किया जा रहा है। इससे यह योजना अब कल्याणकारी नहीं, बल्कि छलावा बनती नजर आ रही है।
महिलाओं ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि ‘बोगस’ का ठप्पा लगाकर लाभ बंद करने की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए और चुनाव के दौरान किए गए वादे के अनुसार 1500 की जगह 2100 रुपये प्रतिमाह की राशि दी जाए। अन्यथा पंचायत समिति और जिला परिषद चुनावों में यही महिलाएं मतदान के जरिए सरकार को जवाब देंगी, ऐसी चेतावनी दी है। मौजूदा हालात में ‘लाड़की बहिण’ योजना विश्वासघात का प्रतीक बनती जा रही है और महिलाओं का गुस्सा अब सड़कों पर उतरने के संकेत दे रहा है।
जून 2024 में शुरू हुई लाडकी बहिन योजना के तहत वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम और परिवार प्रमुख के नाम चारपहिया वाहन न होने की शर्त पर परिवार की दो महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1500 रुपये जमा किए जा रहे थे। अब केवाईसी, नई शर्तें और जटिल नियम लागू कर राशि रोक दिए जाने से सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
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जब आवेदन भरवाने से लेकर जांच और मंजूरी तक पूरी प्रक्रिया सरकारी मशीनरी ने की, तो फिर बोगस आवेदन मंजूर कैसे हुए? इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?” यह तीखा सवाल महिलाएं उठा रही हैं। आरोप है कि विधानसभा चुनाव से पहले मीठे वादों का लालच दिया गया और चुनाव खत्म होते ही उन्हीं महिलाओं को बोगस ठहराने की सोची-समझी साजिश रची गई।