आधार कार्ड में हेरफेर कर लड़कियों की तस्करी, रालेगांव मामले में एड. प्रफुल्ल चव्हाण ने किए चौंकाने वाले दावे
रालेगांव में आदिवासी लड़कियों की बिक्री के मामले में एड. प्रफुल्ल चव्हाण ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने जांच जारी रखी है।
Yavatmal News: रालेगांव में कथित आदिवासी लड़कियों की बिक्री के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है. एक तरफ भाजपा और कुछ हिंदुत्ववादी संगठनों द्वारा गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस प्रशासन बिना ठोस सबूत के किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से साफ इनकार कर रहा है. इस कारण मामला अब आरोप बनाम वास्तविकता की स्थिति में पहुंच गया है. भाजपा कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद में जिला अध्यक्ष एड. प्रफुल्ल चव्हाण ने चौंकाने वाले दावे किए. उन्होंने कहा कि 44 वर्षीय व्यक्ति के साथ महज 15 वर्ष की बालिका का विवाह कराने की कोशिश को उन्होंने विफल किया.
हमने खुद हस्तक्षेप कर बालिका को बचाया और संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है, उन्होंने बताया. एड. चव्हाण ने आगे आरोप लगाया कि एक ऑडियो क्लिप के आधार पर रालेगांव क्षेत्र में मजहर कुरैशी के जरिए मानव तस्करी, जबरन विवाह और धर्मांतरण का रैकेट चल रहा है. उन्होंने यह भी दावा किया कि आधार कार्ड में हेरफेर कर लड़कियों की बिक्री की जाती है और पूनम आत्या नाम की एक महिला का भी इस पूरे नेटवर्क में जिक्र सामने आया है.
कुछ परिवारों की संलिप्तता की भी आशंका जताई गई है. इसके अलावा, आरोपी मजहर कुरैशी पर गोमांस व्यापार और हिंदू देवीदेवताओं के अपमान के आरोप भी लगाए गए. चव्हाण ने कहा कि उसकी पत्नी हिंदू है और उसके माध्यम से लड़कियों व उनके परिवारों से संपर्क कर यह नेटवर्क संचालित किया जाता है. इधर, इन गंभीर और संवेदनशील आरोपों के बीच पुलिस प्रशासन ने संतुलित और साक्ष्य आधारित रुख अपनाया है. पुलिस का कहना है कि बिना ठोस प्रमाण के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा, और फिलहाल मामले की गहन जांच जारी है.
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सबूतों के आधार पर होगी कार्रवाई SP चिंता
जिला पुलिस अधीक्षक कुमार चिंता ने मामले पर संयम बरतने की अपील की है. उन्होंने बताया कि प्राप्त ऑडियो क्लिप्स की साइबर जांच की जा रही है, लेकिन जब तक ठोस साक्ष्य नहीं मिलते, तब तक किसी भी तरह का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 2025 में रालेगांव थाना क्षेत्र में 38 महिलाओं के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई, जिनमें से 37 मिल चुकी हैं, केवल 1 अब भी लापता है.
उसी वर्ष 14 अपहरण मामलों में से 12 लड़कियां बरामद हुईं, जबकि 2 मामलों की जांच जारी है. 2026 में अब तक 9 महिलाओं के लापता होने की शिकायतें आईं, जिनमें से 8 का पता चल चुका है और 1 अभी भी लापता है. इन आंकड़ों के आधार पर पुलिस का कहना है कि बड़े पैमाने पर लड़कियों के गायब होने के दावे अतिरंजित प्रतीत होते हैं. पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि शिकायतें गंभीर हैं और जांच भी उसी गंभीरता से की जा रही है. यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, लेकिन हर निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा, उन्होंने कहा. फिलहाल पूरे जिले की नजर इस मामले की साइबर जांच और आगामी रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जो सच्चाई को सामने ला सकती है.
