यवतमाल: झटाला, घोटी और मारेगांव तालाबों के नाम पर फर्जीवाड़ा, गाद निकाले बगैर रकम हड़पने का आराेप
Gadmukta Dharan Yojana Scam: यवतमाल जिले घाटंजी तहसील के झटाला, घोटी और मारेगांव तालाबों से बिना गाद निकाले 'गादमुक्त धरण, गादयुक्त शिवार' योजना की लाखों की रकम हड़पने का गंभीर आरोप लगा है।
- Written By: केतकी मोडक
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - AI)
Irregularities In Yavatmal Ponds: महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘गादमुक्त धरण, गादयुक्त शिवार’ योजना को घाटंजी तहसील में किस कदर पलीता लगाया जा रहा है, इसका एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस योजना का मूल उद्देश्य जलाशयों की भंडारण क्षमता को बढ़ाना और वहां से निकाली गई उपजाऊ गाद को किसानों के खेतों तक पहुंचाकर भूमि की उर्वरा शक्ति को मजबूत करना है।
महाराष्ट्र सरकार इस पर पानी की तरह पैसा बहा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। घाटंजी तहसील के झटाला, घोटी और मारेगांव के प्रमुख तालाबों से बिना गाद निकाले ही लाखों रुपये का सरकारी भुगतान हड़पने का एक बड़ा और गंभीर आरोप लगाया गया है। यह सनसनीखेज शिकायत अधिवक्ता नीलेश चवरडोल ने संबंधित उच्चाधिकारियों को लिखित रूप में दी है।
सिर्फ उद्घाटन के लिए पहुंचे अफसर
शिकायतकर्ता अधिवक्ता के मुताबिक, इन तीनों तालाबों से गाद निकालने का महत्वपूर्ण काम एक स्थानीय बहुउद्देशीय संस्था (एनजीओ/सोसाइटी) को ठेके पर सौंपा गया था। कार्य के शुभारंभ के नाम पर केवल बड़े-बड़े अधिकारियों और नेताओं की मौजूदगी में एक औपचारिक उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित कर फोटो खिंचवा ली गई। आरोप है कि इस दिखावे के बाद न तो संस्था का कोई कर्मचारी कभी मौके पर काम करने पहुंचा और ना ही तालाब परिसर में गाद निकालने वाली जेसीबी या पोकलेन जैसी भारी मशीनें दिखाई दीं।
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सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि शासन के किसी भी प्रतिनिधि, जिम्मेदार तकनीकी कर्मचारी या क्षेत्रीय अधिकारियों ने मौके पर जाकर यह भौतिक सत्यापन (क्रॉस चेक) करने की जहमत तक नहीं उठाई कि वास्तव में तालाबों से कितनी गाद निकाली गई और कितने जरूरतमंद किसानों को वितरित की गई।
प्रति तालाब 40 से 50 लाख का बिल
शिकायत में सीधे तौर पर आरोप मढ़ा गया है कि योजना के जनहितैषी उद्देश्यों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया और अधिकारियों का पूरा ध्यान प्रत्येक तालाब के नाम पर 40 से 50 लाख रुपये तक का फर्जी भुगतान निकालने पर केंद्रित रहा। अधिवक्ता चवरडोल ने सबूत पेश करते हुए बताया कि झटाला तालाब में गाद निकासी के कार्य का शासकीय उद्घाटन 28 मार्च 2025 को किया गया था, जिसका जियो-टैग फोटो रिकॉर्ड में दर्ज है।
परंतु, जब जमीनी स्तर पर जांच की गई तो चौंकाने वाला सच सामने आया। उद्घाटन के लगभग छह महीने बाद यानी 25 सितंबर 2025 को पहली बार गाद निकालने का वास्तविक कार्य शुरू होने का जियो-टैग रिकॉर्ड दर्ज है। मार्च से सितंबर के बीच का यह लंबा अंतराल पूरे प्रशासनिक तंत्र और ठेकेदार संस्था को गहरे संदेह के घेरे में खड़ा करता है।
इस गड़बड़झाले को लेकर जब सूचना के अधिकार के तहत आधिकारिक जानकारी मांगी गई, तो संबंधित जल संरक्षण विभाग ने जानकारी देने से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया, जिससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि इस बड़े भ्रष्टाचार को दबाने की कोशिश की जा रही है।
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संजय राठौड़ और विधायक तोडसम से उच्च स्तरीय जांच की मांग
अधिवक्ता निलेश चवरडोल ने मानसून की भारी बारिश शुरू होने से पहले एक आपातकालीन कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि झटाला, घोटी और मारेगांव तालाबों की तत्काल प्रभाव से प्रत्यक्ष और निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए। यदि इस जांच में किसी भी प्रकार की वित्तीय हेराफेरी या भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है, तो संबंधित बहुउद्देशीय संस्था को ब्लैकलिस्ट किया जाए और जिम्मेदार भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ फौजदारी मामला दर्ज हो।
इस संवेदनशील घोटाले की गूंज अब मंत्रालयों तक पहुंच चुकी है। अधिवक्ता चवरडोल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी यवतमाल सहित राज्य के मुख्यमंत्री, जिले के पालकमंत्री व मृदा एवं जलसंधारण मंत्री संजय राठौड़ तथा आर्णी-केलापुर विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय विधायक प्रो. राजू तोडसम को सबूतों के साथ लिखित शिकायत सौंपकर इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय सीआईडी या विभागीय जांच कराने की पुरजोर मांग की है।
