यवतमाल में धोखाधड़ी (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Digras Investment Scam: यवतमाल जिले में निवेश पर 15 प्रतिशत ब्याज देने का लालच देकर शिक्षकों व शिक्षकेत्तर कर्मचारियों से कुल 1 करोड़ 58 लाख रुपये की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। इस प्रकरण में लंबे समय से जांच चल रही थी। आखिरकार मंगलवार को दोपहर दिग्रस पुलिस ने कुल पांच आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया।
वहीं इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड रहे केंद्र प्रमुख गिरीश किसनराव दुधे और उसके शिक्षक भाई विनोद किसनराव दुधे को दिग्रस पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। दोनों को न्यायालय में पेश करने के बाद तीन दिनों की पुलिस रिमांड में भेज दिया गया है।
अपराध दर्ज किए गए आरोपियों में मनोज अशोक पाटील (45), पुष्पांजलि दिनेश रंधेरिया (45) दोनों निवासी नालवाड़ी, वर्धा, जबकि गिरीश किसन दुधे (53), विनोदकुमार किसन दुधे (50) और अपर्णा विनोदकुमार दुधे (45) सभी निवासी दिग्रस शामिल हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन पांचों आरोपियों ने दिग्रस के तहसील चौक स्थित बैंक ऑफ इंडिया के सामने ‘डी-ग्रो कैपिटल’ और ‘विश्वांजलि वेंचर’ नामक वित्तीय संस्थाएं शुरू की थीं।
निवेशकों को 15 प्रतिशत ब्याज देने का आश्वासन दिया गया था। इस लालच में आकर 6 अप्रैल 2025 से 15 नवंबर 2025 के बीच सैकड़ों निवेशकों ने कुल 1 करोड़ 58 लाख रुपये का निवेश किया। शुरुआती कुछ महीनों तक निवेशकों को नियमित रूप से ब्याज दिया गया, लेकिन इसके बाद आरोपियों ने ब्याज देना बंद कर दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने निवेशकों से संपर्क भी तोड़ लिया।
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ठगी का एहसास होते ही कई निवेशकों ने दिग्रस पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने प्रारंभिक तौर पर शिकायतों को जांच में रखा। जैसे-जैसे बड़े पैमाने पर आर्थिक ठगी उजागर हुई, थानेदार वैजनाथ मुंडे ने मंगलवार को दोपहर संबंधित पांचों आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत आर्थिक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। साथ ही मास्टरमाइंड गिरीश दुधे को गिरफ्तार कर लिया गया।
1 करोड़ 58 लाख रुपये की इस ठगी के मामले में मास्टरमाइंड गिरीश दुधे और उसके भाई की की गिरफ्तारी के बाद, उसके अन्य तीन फरार साथियों को पुलिस ढूंढ रही है। उनकी गिरफ्तारी के लिए विभिन्न स्थानों पर यवतमाल पुलिस टीमें रवाना की गई हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, फरार तीन आरोपियों को किसी भी समय गिरफ्तार किए जाने की संभावना है।