Akola News: अकोट कॉटन मिल के मजदूरों ने किया जलकुंभ पर विरोध प्रदर्शन
- Written By: नवभारत डेस्क
- पसीने की कमाई न मिलने से उठाया ऐसा कदम
अकोला. अकोट तहसील कॉटन मिल की वर्तमान स्थिति बहुत खराब है और दिवालिया हुई यह सहकारी संस्था अब व्यापारियों के नियंत्रण में आ गई है. हालांकि, कई वर्षों से कपास मिल का नाम रोशन करने वाले श्रमिक अपने पसीने की कमाई के लिए बेताब हो गए हैं. उनके पसीने की कमाई न मिलने से परेशान होकर मंगलवार को इन मजदूरों ने एक पानी की टंकी पर चढ़ कर विरोध प्रदर्शन किया.
अकोट तहसील सहकारी कपास मिल को 2007 में महाराष्ट्र राज्य सहकारी एपेक्स बैंक द्वारा अधिग्रहित किया गया था. सन 2010 में, यह संस्था दिवालिया हो गयी थी. बैंक ने संस्थान से बकाया वसूलने के लिए संस्थान को पट्टे पर देने या स्वामित्व पर देने की भी कोशिश की. इस बीच संस्था बंद होने से बेरोजगार हुए मजदूरों ने अपना बकाया पाने के लिए तरह-तरह की लड़ाई शुरू कर दी. उन्होंने श्रम न्यायालय और उच्च न्यायालय में भी दावे दायर किए. उस संघर्ष में मजदूरों की हार हुई थी.
अदालत ने सभी पहलुओं की जांच की और फैसला सुनाया कि कपास मिल को कुल 15,38,66,298 रुपये लेने थे, जिसमें श्रमिकों को भविष्य निधि के रूप में 53,66,298 रुपये और श्रमिकों के वेतन के रूप में 14.85 करोड़ रुपये शामिल थे. मजदूरों ने अपने बकाए की वसूली के लिए कई बार मोर्चा भी निकाला. इस बीच, 5 जनवरी, 2022 को, बैंक ने अपनी 24 वीं सार्वजनिक सूचना जारी की. इसके जवाब में बैंक को दो टेंडर मिले. जिसमें सबसे ज्यादा रेटिंग वाला यह टेंडर अमरावती के एक व्यक्ति ने लिया था. उसने ने सरकार के 61 लाख रुपये और श्रमिकों से 15,38,66,298 रुपये के विभिन्न बकाये को चुकाने की गारंटी के साथ संस्थान को 11,67,11,111 रुपये में खरीदा.
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केवल मजदूरों को इंतजार कराया गया
टेंडर लेनेवाले के नाम से फेरफार और सतबारा दर्ज किया गया. इसे दर्ज करने से पहले खरीददार ने सरकार के सभी बकाये का भुगतान किया, केवल श्रमिकों का बकाया रखा, जबकि श्रमिकों के भुगतान को पहले प्राथमिकता दी जानी थी. अब श्रमिकों के बकाये का भुगतान करने की दिशा में कोई भी पहल करने को तैयार नहीं है. नतीजतन, पसीने और हक की कमाई के बावजूद, श्रमिक अभी भी इससे वंचित हैं. जब तक इस संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है, तब तक आंदोलन जारी रहेगा, यह निर्धार सरकार को सौंपे ज्ञापन में नामदेव हाडोले, किशोर भगत, विलास कोकाटे, मुकुंद खनके, शिवदास खराटे, देवानंद महाले, प्रभुदास केदार, ओकारसिंह बघेले, अरुण काकड़, रवि वाघमारे, राजकुमार मेढे, मनोज देशमुख ने किया है.
