शरद पवार (सौजन्य : सोशल मीडिया)
मुंबई : वक्फ संशोधन बिल को लेकर संसद के दोनों सदनों से लेकर पूरे देश में हंगामा चल रहा है। रात-रात भर संसद में बहस हुई उसके बाद सांसदों के मतों के आधार पर दोनों सदनों में आखिरकार बिल पास कर दिया गया। कांग्रेस, आप, सपा, बसपा समेत तमाम राजनीतिक संगठनों ने बिल का विरोध किया, लेकिन सदन में शरद पवार की गैरमौजूदगी कई सवाल खड़े करती है। वरिष्ठ नेता पवार के साथ ही उनकी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दो अन्य नेता भी सदन कार्यवाही के दौरान मौजूद नहीं थे। ऐसे में ये सवाल उठता है कि वह बिल के समर्थन में हैं या विरोध में ?
वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर एनसीपी की भूमिका को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। ऐसा इसलिए क्योंकि बिल को लेकर संसद के दोनों सदनों में हुई चर्चा और वोटिंग से एनसीपी के सांसद अमोल कोल्हे और शरद चंद्र पवार पार्टी के नेता सुरेश बाल्या मामा म्हात्रे सदन में गैर हाजिर रहे। सांसद सरेश म्हात्रे वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर बनाई गई जेपीसी कमेटी के सदस्य भी थे, फिर भी वह इस अहम चर्चा में शामिल नहीं रहे। ये कहीं न कहीं सवाल खड़े करता है।
राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के सदस्यों और करीबियों का कहना है कि शरद पवार बीमार थे और वह मुंबई में ही अपना इलाज करवा रहे थे। इस वजह से वह वक्फ बिल पर दोनों सदनों में हुई चर्चा में शामिल नहीं हो पाए। हालांकि पवार के अन्य दोनों नेताओं ने क्यों इस महत्वपूर्ण चर्चा से खुद को दूर रखा इसे लेकर अभी तक पार्टी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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अजित पवार गुट के मुस्लिम नेताओें में भी वैचारिक मतभेद से नजर आ रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष और सांसद सुनील तटकरे ने लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक के पक्ष में मतदान किया है। इससे मुस्लिम नेताओं में असमंजस है। पार्टी के अंदरखाने से बात आ रही है कि जब समाज सेक्युलर विचारधारा लेकर चलने की बात करता है तो अल्पसंख्यकों के साथ ऐसे समय में साथ क्यों नहीं खड़ा होता है। यह भी चर्चा है कि मुद्दों को लेकर वह जल्द ही पार्टी प्रमुख से मिलेंगे।