महाराष्ट्र में 305 तालुका सूखा प्रभावित: किसानों को ₹77 हजार करोड़ का नुकसान! सोयाबीन-कपास पर सबसे ज्यादा असर

Maharashtra Drought: महाराष्ट्र के 305 तालुकों में सूखा घोषित। सोयाबीन, कपास, तुअर, मक्का और धान की फसलों पर सबसे ज्यादा असर। जानिए खरीफ बुआई का क्षेत्र, प्रमुख फसलों का हिस्सा और नुकसान के आंकड़े।
Crops Damage Due To Drought In Maharashtra Devendra Fadnavis
खेताें में जाकर फसलों को जायजा लेते मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीससोर्स: सोशल मीडिया
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Highlights

  • महाराष्ट्र में 358 में से 305 तालुकाओं में सूखा घोषित किया।

  • सोयाबीन और कपास की पैदावार में 50-60% तक गिरावट का अनुमान।

  • महाराष्ट्र के किसानों को लगभग ₹77 हजार करोड़ का नुकसान

Crops Damage Due To Drought In Maharashtra: महाराष्ट्र में खरीफ सीजन 2026 के दौरान कमजोर बारिश के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने राज्य की कुल 358 में से 305 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। कृषि और राजस्व विभाग की टीमें खेतों में पंचनामा कर फसल नुकसान का आकलन कर रही हैं।

महाराष्ट्र के किसानों को करीब ₹77 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। अनुमान के मुताबिक, मराठवाड़ा में ₹35,000 करोड़, विदर्भ में ₹22,000 करोड़ और उत्तर, पश्चिम महाराष्ट्र तथा कोंकण में करीब ₹20,000 करोड़ का नुकसान हुआ है। यह आंकड़ें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने एक प्रेजेंटेशन के दौरान दिए है। हालांकि, इस राशि की पुष्टि करने वाला सरकारी आकलन उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे अंतिम नुकसान या सरकार द्वारा स्वीकृत आंकड़ों की रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

महाराष्ट्र में सूखे से किन फसलों को हुआ सबसे ज्यादा नुकसान?

महाराष्ट्र में सूखे से सबसे ज्यादा नुकसान सोयाबीन और कपास की फसल को होने का अनुमान है। महाराष्ट्र में खरीफ के सीजन में सोयाबीन और कपास की फसल सबसे प्रमुख है। इन दो फसलों का रकबा 87.85 लाख हेक्टेयर यानी 64.2% प्रतिशत है।

  • सोयाबीन: महाराष्ट्र की प्रमुख खरीफ फसलों में सोयाबीन की फसल शामिल है। अगस्त और सितंबर में बारिश के लंबे अंतराल से इस बार सोयाबीन की फसल कटाई से पहले ही खेतों में सूख गई। फलियां आने की संवेदनशील अवस्था में बारिश रुकने से नमी खत्म हो गई और पौधे पीले पड़ गए। मराठवाड़ा व विदर्भ के किसानों के अनुसार, सोयाबीन की पैदावार में 50 से 60 फीसदी की गिरावट आई है।

  • कपास: विदर्भ और मराठवाड़ा की प्रमुख नकदी फसलों में से एक कपास की फसल है। बारिश की कमी और अधिक तापमान से पौधों की वृद्धि, फूल और टिंडे बनने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। इससे उत्पादन और कपास की गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका है।

Crops Damage Due To Drought In Maharashtra
सूखा प्रभावित किसानसोर्स: सोशल मीडिया
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महाराष्ट्र में खरीफ बुआई का कितना क्षेत्र?

जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र में खरीफ फसलों का सामान्य बुआई क्षेत्र करीब 1.44 करोड़ हेक्टेयर है। इस सीजन लगभग 1.37 करोड़ हेक्टेयर में बुआई हुई।

तुअर, मक्का और धान पर भी असर की आशंका

सोयाबीन और कपास के अलावा तुअर, मक्का और धान भी खरीफ सीजन की अहम फसलें हैं। इन फसलों पर भी सूखे का असर पड़ा है। राज्य कृषि विभाग के अगस्त के आंकड़ों में मक्का, धान और तुअर के बुआई क्षेत्र में पिछले साल की तुलना में कमी दर्ज की गई थी।

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पंचनामा और अंतिम नुकसान रिपोर्ट पर नजर

सूखा प्रभावित क्षेत्रों में महाराष्ट्र सरकार की कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें खेतों का निरीक्षण कर रही हैं। इन सर्वेक्षणों से फसल नुकसान का क्षेत्र, प्रभावित किसानों की संख्या और संभावित राहत की जरूरत स्पष्ट होगी।

उदाहरण के तौर पर, 22 अक्टूबर 2026 की एक रिपोर्ट में नासिक जिले के 10 सूखा प्रभावित तालुकों में 5.07 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फसल नुकसान और 5.16 लाख से अधिक प्रभावित भूमि धारकों का आकलन बताया गया। यह नासिक जिले का आंकड़ा है, पूरे महाराष्ट्र का नहीं।