

महाराष्ट्र के 358 में से 305 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है।
मराठवाड़ा के 8 में से 5 जिलों के बांधों में जलभंडारण स्थिति चिंताजनक है।
धाराशिव के बांधों में 6.89%, हिंगोली में 7.06% और जालना में 9.34% पानी बचा है।
Marathwada Dam Water Level: महाराष्ट्र में खरीफ सीजन 2026 के दौरान सूखे की स्थिति गंभीर होती जा रही है। राज्य सरकार ने सूखा प्रभावित तालुकों की संख्या 265 से बढ़ाकर 305 कर दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 14 अक्टूबर को घोषणा की कि प्रभावित किसानों को दिवाली से पहले ₹5,000 की शुरुआती आर्थिक सहायता उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। सरकार ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत उपाय लागू करने की बात भी कही है। महाराष्ट्र में कुल 358 तालुके हैं, जिनमें से 305 अब सूखा प्रभावित घोषित किए गए हैं।
इस बीच मराठवाड़ा के बांधों में जल भंडारण की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है। धाराशिव, हिंगोली जालना, बीड और लातूर की स्थिति बेहद चिंताजनक है। 15 अक्टूबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, धाराशिव में जल भंडारण सिर्फ 6.89% है।
वहीं हिंगोली में 7.06% और जालना में 9.34% दर्ज किया गया है। बीड और लातूर में भी जल भंडारण 13% से कम है। इससे मराठवाड़ा इलाके में कृषि, ग्रामीण पेयजल और आने वाले महीनों की जल उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, मराठवाड़ा के आठ जिलों में बांधों के जल भंडारण की स्थिति इस प्रकार है।
इन आंकड़ों में छत्रपति संभाजीनगर में जल भंडारण सबसे ज्यादा 68.39% है, जबकि धाराशिव में सबसे कम 6.89% दर्ज किया गया है। नांदेड में जल भंडारण 52.91% है। दूसरी ओर, धाराशिव, हिंगोली, जालना, लातूर और बीड में बांधों की स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण दिखाई देती है।
पिछले साल की इसी अवधि से तुलना करने पर उपलब्ध आंकड़ों में सभी 8 जिलों का जल भंडारण कम है। हिंगोली में पिछले साल 99.13% जल भंडारण था, जो अब 7.06% बताया गया है। जालना में यह 81.38% से घटकर 9.34% और लातूर में 90.21% से घटकर 11.42% रह गया है।
धाराशिव में पिछले साल 75.34% के मुकाबले इस बार 6.89% जल भंडारण है। बीड में यह 75.08% से घटकर 12.14% और परभणी में 78.85% से घटकर 17.17% दर्ज किया गया है। नांदेड में भी पिछले साल के 87.02% की तुलना में इस बार 52.91% पानी उपलब्ध बताया गया है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 14 अक्टूबर को सूखाग्रस्त तालुकों की संख्या 365 से बढ़ाकर 305 करते हुए घोषणा की कि सूखा प्रभावित किसानों को दिवाली से पहले ₹5,000 की शुरुआती सहायता देने की योजना है।
इसके अलावा प्रभावित तालुकों में 12 प्रकार की राहत और रियायतों का प्रावधान बताया गया है। इनमें कृषि ऋण का पुनर्गठन, कृषि ऋण वसूली पर रोक, भूमि राजस्व में रियायत, कृषि पंपों के बिजली बिल में राहत और विद्यार्थियों की परीक्षा फीस में छूट शामिल हैं। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार टैंकरों से पेयजल उपलब्ध कराने और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया है।
मराठवाड़ा में बांधों में कम जल भंडारण चिंता का संकेत है, लेकिन शहर में तत्काल पानी कटौती लागू हो जाएगी, यह कहना अभी सही नहीं होगी। पेयजल आपूर्ति का निर्णय स्थानीय प्रशासन, जल आरक्षण, उपलब्ध भंडार और मांग के आधार पर लिया जाता है। सूखा घोषणा मुख्य रूप से कृषि और ग्रामीण राहत से जुड़ी है।