खरीफ सीजन 2026: वाशिम में 3 लाख हेक्टेयर पर होगी सोयाबीन की बुआई, कृषि विभाग ने जारी की सलाह
Kharif Season 2026 : वाशिम जिले में खरीफ सीजन 2026 के तहत करीब 4 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का नियोजन किया गया है, जिसमें 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुआई का लक्ष्य रखा गया है।
Soybean Sowing (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Washim Soybean Sowing: वाशिम खरीफ सीजन 2026 के लिए करीब 4 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का नियोजन किया गया है। इन में से इस साल भी सबसे अधिक 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुआई का लक्ष्य रखा गया है। जिस से इस साल भी जिले में सोयाबीन की फसल ही मुख्य फसल के रुप में रहेगी। कृषि विभाग की जानकारी के अनुसार किसानो के पास करीब डेढ लाख क्विंटल घरेलू बीज उपलब्ध है। जिस से अनेक किसान बाजार से नए बीज की खरीदी करने की जगह पर घरेलू बीज बुआई के लिए उपयोग करने वाले है, लेकिन यह घरेलू बीज सीधे बुआई के लिए यदि इस्तेमाल करते है तो इसमें विविध प्रकार के खतरे की संभावना है।
इसमें बीज अंकुरण की क्षमता कम रहना, रोगो का संक्रमण होना और उत्पादन में कमी आ सकती है, इसलिए घरेलू बीजो का बुआई के लिए उपयोग करने के पहले कुछ बातो पर ध्यान देना आवश्यक है। गत सीजन में हुए बारिश के उतार चढाव, कटाई के समय हुई, आद्रता और स्टॉक में रहनेवाली कमिया से अनेक स्थानो पर घरेलू बीजो की गुणवत्ता प्रभावित होने की संभावना है।
अंकुरण क्षमता प्रभावित होती है विशेष
यह कि सोयाबीन बीजो की अंकुरण क्षमता कालांतरण से कम हो जाती है, इसलिए बुआई के पूर्व अंकुरण टेस्टिंग करा लेना फायदेमंद रहता है। इसमें 100 बीजो की अंकुरण टेस्टिंग करके इन में से कितने बीज अंकुरित किस प्रकार से होते है। इस का अंदाजा लिया जाता है। सोयाबीन फसल में शुरुआती अवस्था में बुरशीजन्य रोगो का संक्रमण बडे प्रमाण में पाया जाता है। जिस से घरेलू बीजो पर सिफारिश अनुसार बुरशी नाशको की बीजप्रक्रिया करना चाहिए, साथ ही कुछ जैविक संवर्धन का उपयोग करने पर फसल वृध्दि अच्छे से होती है।
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डेढ़ लाख क्विंटल घरेलू बीज तैयार
विशेषज्ञो के अनुसार अनेक किसान घरेलू बीजो का चुनते हुए ही बुआई के लिए उपयोग करते है, लेकिन बुआई के पहले ही घरेलू बीजो को चुनकर अच्छे बीज निकालकर ही बुआई करना चाहिए। जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी ने बताया कि, किसानो के पास बडे प्रमाण में सोयाबीन के घरेलू बीज उपलब्ध है, लेकिन उन्होने यह बीज बुआई के पूर्व उसकी अंकुरण क्षमता टेस्टींग, बीज प्रक्रिया और जैविक संरक्षण का उपयोग करना जरुरी है। योग्य प्रक्रिया करने पर बीजो की अंकुरण क्षमता सुधार कर उत्पादन बढने केलिए मदद होगी।
