किसान घाटे में और व्यापारी मुनाफे में, सोयाबीन के बढ़े दाम से किसानों में नाराज़गी, व्यापारियों को बड़ा फायदा
Akola Soybean Prices : अकोला में सोयाबीन के बाजार भाव 7,000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंचने के बाद किसानों में नाराज़गी बढ़ गई है। वे बढ़ती लागत, कर्ज़, महंगे बीज-खाद और सिंचाई समस्याओं से जूझ रहे।
Soybean Rate (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Akola Farmers Protest: अकोला जिले के किसान पहले से ही अनेक समस्याओं से जूझ रहे हैं और अब सोयाबीन के बढ़े बाजार भाव ने उनकी नाराज़गी और बढ़ा दी है। आर्थिक दबाव, कर्ज़ और घरेलू खर्चों के चलते कई किसानों ने कुछ महीने पहले ही 3,500 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल दर पर सोयाबीन बेच दिया था। उस समय सरकार की ओर से ठोस समर्थन मूल्य तय न होने और तत्कालीन आर्थिक जरूरतों के कारण किसानों के पास कोई विकल्प नहीं था। अब जब बाजार में भाव 7,000 रुपये के पार पहुंच गए हैं, तो इसका लाभ केवल व्यापारियों को मिल रहा है जिन्होंने माल सस्ते में खरीदकर गोदामों में जमा किया था।
बढ़ते खर्च और नकली बीजों से संकट किसानों का कहना है कि जब उनके पास माल था तब भाव नहीं मिले, और अब व्यापारी लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं। दूसरी ओर, खाद, बीज और कीटनाशक दवाओं के बढ़ते दामों ने किसानों की कमर तोड़ दी है। डीएपी, यूरिया, दवाएं और गुणवत्तापूर्ण बीज महंगे हो गए हैं, जिससे किसानों को कर्ज़ लेकर खेती करनी पड़ रही है।
4 हजार में बेचा अब 7 हजार पार भाव
कई जगह नकली बीज और निकृष्ट दवाओं की बिक्री की शिकायतें भी बढ़ रही हैं, जिसका सीधा नुकसान किसानों को हो रहा है। ठोस सरकारी उपायों की मांग बेमौसम बारिश, बढ़ते तापमान, सिंचाई की कमी और बिजली आपूर्ति में खंडित व्यवस्था ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है जबकि उपज का उचित भाव नहीं मिल रहा है।
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किसानों का फूटा गुस्सा
ऐसे में किसान आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं। किसानों ने मांग की है कि सरकार तुरंत ठोस कदम उठाए। खाद, बीज और दवाओं के दाम नियंत्रित करें, सोयाबीन सहित सभी फसलों को समर्थन मूल्य दे, फसल भंडारण की सुविधा उपलब्ध कराए और बाजार समितियों में पारदर्शी खरीद व्यवस्था सुनिश्चित करे। यह नाराज़गी अब जिले के किसानों की सामूहिक आवाज़ बन चुकी है।
