आपदा प्रबंधन कार्यशाला: घबराएँ नहीं, सजगता और आधुनिक तकनीक से बचाई जा सकती है अनमोल जानें
आपदा के समय सजगता और तत्परता ज़रूरी है। जानें कैसे आपदा व्यवस्थापन प्रशिक्षण से बचाव के उपायों को समझा जा सकता है।
IMD Weather Forecasting: आपदा के समय यदि बिना घबराए स्थिति को संभाला जाए तो कई जानें बचाई जा सकती हैं। इसलिए आपदा व्यवस्थापन का प्रशिक्षण और जनजागृति आवश्यक है। यही मार्गदर्शन विशेषज्ञों ने जिला नियोजन समिति द्वारा आयोजित एक दिवसीय जिला स्तरीय आपदा व्यवस्थापन प्रशिक्षण कार्यशाला में किया।
कार्यशाला में एनडीआरएफ पुणे और एसडीआरएफ नागपुर की टीम ने प्रस्तुतीकरण के जरिए आपदा व्यवस्थापन पर विस्तार से मार्गदर्शन किया। नागरिकों को बताया गया कि विविध प्रकार की आपदाओं के समय स्वयं की और दूसरों की जान कैसे बचाई जा सकती है।
आधुनिक तकनीक से मौसम का अनुमान लगाने के विषय में आईएमडी के डा. प्रवीण कुमार ने मौसम बदलाव, लो प्रेशर पट्टे, अतिवृष्टि और तूफान जैसी प्राकृतिक घटनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक से मौसम का अनुमान लगाया जा सकता है और नागरिकों को संकेतों पर ध्यान देकर समय पर सावधानी बरतनी चाहिए।
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रविद्र आखरे ने आपदा की स्थिति में तुरंत और सही प्रतिसाद देने के महत्व को समझाया। एस.पी. बोदर ने बाढ़ में लोगों की जान बचाने और उपलब्ध साधनों का उपयोग करने की जानकारी दी।
डा. पराग राठौड़ ने हीटस्ट्रोक से बचाव, हीटवेव के दौरान क्या करें और क्या न करें, इस पर मार्गदर्शन दिया। अनुराग पचोरी ने बिजली गिरने से बचाव के उपाय बताए।
उपजिलाधिकारी विश्वनाथ घुगे ने कहा कि आपदा कभी भी आ सकती है, इसलिए अधिकारियों, कर्मचारियों और नागरिकों को आपदा व्यवस्थापन की जानकारी होना आवश्यक है।
प्रशिक्षण में स्वयंसेवी संस्था के दीपक सदाफले, गजानन मेसरे, श्याम सवाई, अमोल काले, अनिल वाघ, अतुल उमाले आदि उपस्थित रहे। प्रशिक्षण की सफलता के लिए नायब तहसीलदार अनिल घोडे, राजस्व सहाय्यक विनोद मारवाडी, रवि अंभोरे, श्रीकांत वदोडे, गजानन उगले, तौकीर बेनिवाले, धनंजय जाधव, मेटांगे आदि ने अथक परिश्रम किए।
