

Washim Custodial Death: वाशिम में चोरी के एक मामले में रिसोड पुलिस की हिरासत में बंद एक युवक की पुलिस की बेरहमी से पिटाई के कारण मौत हो गई थी। इस मामले में कोर्ट ने तत्कालीन थाना प्रभारी सहित 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। यह ऐतिहासिक फैसला वाशिम जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयसिंह झपाटे ने गुरुवार को सुनाया। करीब 15 साल के बाद पीड़ित परिवार को आखिरकार न्याय मिला।
अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए पुलिसकर्मियों में तत्कालीन थाना प्रभारी महादेव धांडे, पुलिस कर्मचारी मदन पवार, शिवाजी खिल्लारी, पंजाब पाटकर, रमेश पवार, प्रकाश तारम, नागोराव खांडके, अशोक वैद्य और वसंत जाधव शामिल हैं। इस बेरहम मारपीट में जान गंवाने वाले युवक का नाम बेंग्या पवार (निवासी वाढोणा, तहसील सेनगांव, जिला हिंगोली) था।
9 मई 2011 को चोरी के एक मामले में संदिग्ध के तौर पर बेंग्या पवार और राजू शेषराव पवार को गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई तत्कालीन थानेदार धांडे की टीम ने हिंगोली जिले के सेनगांव में की थी। चोरी का जुर्म कबूल करवाने के लिए पुलिस ने बेंग्या को अमानवीय रूप से पीटा, जिसके कारण पुलिस हिरासत में उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके शरीर पर 43 गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे।
इतनी गंभीर घटना होने के बावजूद वाशिम पुलिस ने शुरुआत में इस मामले को महज 'आकस्मिक मौत' के रूप में दर्ज किया था। मृतक के माता-पिता ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोला और शिकायत दर्ज कराई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीआईडी को सौंप दी गई। सीआईडी ने गहन जांच के बाद 34 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट में साफ किया कि इस मौत के लिए पुलिसकर्मी ही जिम्मेदार हैं। आरोपियों पर हत्या और एट्रोसिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।