वर्धा में मानसून की बेरुखी से जुलाई में भी गहराया जलसंकट, 90 गांवों में 92 निजी कुओं का हुआ अधिग्रहण
Wardha Water Crisis: वर्धा जिले में मानसून की धीमी रफ्तार के कारण बारिश के मौसम में भी पेयजल संकट गंभीर हो गया है। स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन ने 92 निजी कुओं का अधिग्रहण कर जलापूर्ति शुरू की है।
- Written By: केतकी मोडक
सूखा कुओं प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मीडिया)
Wardha Water Crisis Monsoon Delay: वर्धा जिले में मानसून की रफ्तार धीमी रहने से बारिश के मौसम में भी जलसंकट गहराता जा रहा है। जुलाई का आधा महीना बीतने के बावजूद अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य से काफी कम वर्षा हुई है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है, वहीं कई गांवों में पेयजल संकट भी गंभीर होता जा रहा है। स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने अब तक 90 गांवों में 92 निजी कुओं का अधिग्रहण कर पेयजल आपूर्ति शुरू की है।
इसके अलावा नल जलापूर्ति योजनाओं की विशेष मरम्मत, 100 से अधिक गांवों में सार्वजनिक कुओं का गहरीकरण तथा आवश्यकता के अनुसार नए बोरवेल खोदने का कार्य भी जारी है। जिले में अब तक लगभग 200 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। पिछले कुछ दिनों से बादल छाए रहने के बावजूद पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, जिससे उमस और गर्मी बढ़ गई है।
पिछले वर्ष जुलाई के शुरुआती दिनों में वर्धा जिले में भारी वर्षा हुई थी, जबकि इस वर्ष जून लगभग सूखा रहा। केवल 1 और 2 जुलाई को जिले के 18 राजस्व मंडलों में अतिवृष्टि दर्ज की गई, उसके बाद वर्षा लगभग थम गई। जिले में मध्यम और बड़े 11 जलाशयों में फिलहाल लगभग 51 प्रतिशत जल भंडारण है, जबकि 21 लघु जलाशयों में जलसंचय काफी कम बताया जा रहा है। यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो आने वाले दिनों में जलसंकट और गंभीर हो सकता है।
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आष्टी, आर्वी और कारंजा में स्थिति अधिक चिंताजनक
भूजल सर्वेक्षण विभाग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार आष्टी, आर्वी और कारंजा तहसीलों में भूजल स्तर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा आष्टी, आर्वी, कारंजा, हिंगनघाट, समुद्रपुर, सेलू और वर्धा तहसील के कई गांवों में अब भी पेयजल संकट बना हुआ है। यदि आगामी दिनों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो जिले में जल उपलब्धता को लेकर स्थिति और गंभीर हो सकती है।
906 उपाय योजनाएं प्रस्तावित
वर्ष 2026-27 के लिए ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने वर्धा जिले के 777 गांवों में संभावित जलसंकट से निपटने हेतु 906 उपाय योजनाएं प्रस्तावित की हैं। इन पर लगभग 36 करोड़ 43 लाख 40 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रशासन द्वारा नल जलापूर्ति योजनाओं की मरम्मत, सार्वजनिक कुओं का गहरीकरण, निजी कुओं का अधिग्रहण तथा नए बोरवेल निर्माण जैसे कार्य किए जा रहे हैं।
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तहसीलवार गांव व कुओं का अधिग्रहण
| तहसील | अधिग्रहित गांव | अधिग्रहित कुएं |
| आर्वी | 11 | 11 |
| आष्टी | 05 | 05 |
| देवली | 05 | 05 |
| हिंगनघाट | 18 | 18 |
| कारंजा | 15 | 15 |
| समुद्रपुर | 14 | 14 |
| सेलू | 07 | 09 |
| वर्धा | 15 | 15 |
| कुल | 90 | 92 |
