वर्धा अर्बन बैंक घोटाला: पूर्व प्रबंधक प्रवीण बोरकर 11 जून तक पुलिस रिमांड पर, EOW करेगी जांच
EOW Investigation: वर्धा अर्बन एंड रुरल कोऑपरेटिव बैंक में कथित वित्तीय हेराफेरी मामले में पूर्व प्रबंधक प्रवीण बोरकर को गिरफ्तार कर 11 जून तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
Locker Scam (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Wardha Urban Bank Scam: वर्धा शहर के कच्छी लाइन स्थित वर्धा अर्बन एंड रुरल कोऑपरेटिव बैंक में सामने आए कथित हेराफेरी प्रकरण में बैंक के तत्कालीन प्रबंधक प्रवीण बोरकर को अतंत पुलिस ने हिरासत में लिया है़। उसे न्यायालय में पेश करने पर 11 जून तक पुलिस कस्टडी सुनाई गई है़।
उल्लेखनिय यह कि, अपहार की राशि बढ़ने की संभावना के चलते इस प्रकरण को आर्थिक अपराध शाखा को सौंपने की जानकारी है़। ज्ञात हो कि आरोपी प्रवीण बोरकर ने बैंक में प्रबंधक के रुप में काम करते समय लाखों की हेराफेरी की़ एक महिला को एफडी व आभूषण लॉकर में रखने के नाम पर लगभग 35 लाख का चुना लगाया़।
वर्धा अर्बन बैंक में करोड़ों की हेराफेरी की आशंका
यही नहीं तो बैंक प्रशासन ने भी उसके खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज की है़ इसके अलावा छोटीबड़ी कुल 9 शिकायतें पुलिस को बोरकार के खिलाफ मिली है़। बैंक में नकली सोना रखने के मामले में भी उसका हाथ होने की जानकारी है़।
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मामला दर्ज होने के बाद शहर थाने के पीएसआई उमेश उगले की टीम ने आरोपी प्रवीण बोरकर को उसके धूनिवाले मठ परिसर स्थित मकान से हिरासत में लिया़। सोमवार को उसे जिला न्यायालय में पेश किया गया़ जहां से 11 जून तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया़। इस हेराफेरी का आंकड़ा एक करोड़ से अधिक होने की आशंका है़। परिणामवश प्रकरण की आगे की जांच आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दी गई है़। इसमें कई गंभीर खुलासे होने की संभावना है़।
कुएं में गिरी 8 नीलगायों का रेस्क्यू
वर्धा वन परिक्षेत्र के जांगोणा गांव में एक खेत की धंसी हुई कुएं में गिर गईं 8 नीलगायों को वन विभाग ने करीब 3 घंटे की विशेष बचाव कार्रवाई चलाकर सुरक्षित बाहर निकाला। प्यास बुझाने की तलाश में खेतों तक पहुंचे नीलगायों का झुंड दुर्घटनावश कुएं में गिर गया था। घटना की जानकारी मिलने पर वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। अधिकारियों के मार्गदर्शन में जेसीबी मशीन की सहायता से कुएं के किनारे रैंप तैयार किया गया, ताकि नीलगायों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
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शाम 7 बजे शुरू हुई यह कार्रवाई रात करीब 9.30 बजे तक चली। शुरुआत में डरी हुई नीलगायें रैंप का उपयोग करने से हिचकिचा रही थीं, लेकिन कुछ समय बाद एक नीलगाय ने बाहर निकलने का प्रयास किया। उसके पीछे-पीछे बाकी सात नीलगायें भी सुरक्षित बाहर आ गईं और जंगल की ओर लौट गईं।
