

तारा सावंगा के किसान विनायक हेडाऊ ने मोसंबी के करीब 200 पेड़ काटे।
कम बारिश से कुएं का जलस्तर घटने के कारण सिंचाई प्रभावित हुई।
फलों की गिरावट और कम बाजार भाव से खेती की लागत निकालना मुश्किल।
प्रभावित किसान ने नुकसान का सर्वे कर सरकारी सहायता देने की मांग की।
Wardha Farmer Cuts Sweet Lime Trees Water Shortage: वर्धा जिले की आष्टी तहसील के तारा सावंगा में पानी की कमी, फलों की गिरावट और बाजार में उचित भाव नहीं मिलने से किसान विनायक हेडाऊ को अपनी दो एकड़ की मोसंबी की बाग के करीब 200 पेड़ काटने पड़े। किसान ने कृषि और राजस्व विभाग से नुकसान का सर्वे कर सरकारी सहायता देने की मांग की है।
वर्धा, जीवनभर की मेहनत और पूंजी लगाकर तैयार की गई मोसंबी की बाग को अपनी आंखों के सामने उजड़ते देखना किसी भी किसान के लिए बेहद पीड़ादायक है। वर्धा जिले की आष्टी तहसील के अंतिम छोर पर स्थित तारा सावंगा के किसान विनायक हेडाऊ के सामने भी ऐसी ही स्थिति पैदा हो गई। पानी की कमी, फलों की गिरावट और बाजार में अपेक्षित भाव नहीं मिलने के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे हेडाऊ ने आखिरकार अपनी दो एकड़ की बाग के करीब 200 मोसंबी के पेड़ काट दिए।
विनायक हेडाऊ और उनकी पत्नी सुमित्रा हेडाऊ ने मोसंबी की खेती के लिए काफी मेहनत की थी। पेड़ों की नियमित देखभाल, खाद, दवाइयों के छिड़काव और सिंचाई पर उन्होंने समय के साथ बड़ी रकम खर्च की। पेड़ों पर फल लगने के बाद उन्हें अच्छी आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन परिस्थितियां उनके विपरीत हो गईं।
क्षेत्र में पर्याप्त बारिश नहीं होने से कुएं का जलस्तर नीचे चला गया। इसके चलते बाग को जरूरत के मुताबिक पानी देना मुश्किल हो गया। सिंचाई प्रभावित होने से फलों की गिरावट शुरू हो गई और उत्पादन पर असर पड़ा।
मोसंबी की खेती में पहले से ही खाद, कीटनाशक, मजदूरी, फल तोड़ने और परिवहन पर खर्च करना पड़ता है। ऐसे में पानी की कमी के कारण उत्पादन घटने और बाजार में उचित कीमत नहीं मिलने से किसान के सामने लागत निकालने का संकट खड़ा हो गया।
दो एकड़ में फैली बाग को बचाने के लिए लगातार खर्च करना हेडाऊ दंपती के लिए मुश्किल होता गया। एक ओर सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं था, तो दूसरी ओर फसल से अपेक्षित आमदनी मिलने की संभावना भी कम हो गई। आखिरकार किसान विनायक हेडाऊ ने करीब 200 मोसंबी के पेड़ों को काटने का कठोर निर्णय लिया।
इस घटना ने क्षेत्र में फल उत्पादक किसानों के सामने मौजूद पानी और बाजार से जुड़ी समस्याओं को फिर उजागर किया है। किसानों को आशंका है कि ऐसी परिस्थितियों में खेती पर किया गया निवेश डूबने से परिवार की आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है।
क्षेत्र में वन्यप्राणियों से होने वाले नुकसान की समस्या भी किसानों की चिंता बढ़ा रही है। हेडाऊ दंपती की बाग को हुए नुकसान के मद्देनजर कृषि और राजस्व विभाग से तत्काल निरीक्षण कर नुकसान का आकलन करने तथा सरकारी नियमों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
अब प्रभावित किसान को सरकारी सहायता कब और कितनी मिलती है, इस पर क्षेत्र के किसानों की नजरें टिकी हैं।