

Highlights:
सेवानिवृत्त पुलिस कल्याणकारी शिखर संस्था के नेतृत्व में पुलिसकर्मियों ने डॉ। बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा के पास एकत्रित होकर जिलाधिकारी कार्यालय तक आंदोलन किया।
आंदोलनकारियों ने पुलिस कांस्टेबल और लिपिक संवर्ग के वेतन स्तरों में अंतर को दूर करने की मांग उठाई।
सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों ने कार्यरत पुलिस कर्मचारियों की तरह उन्हें और उनके परिवारों को भी स्वास्थ्य योजना का लाभ देने की मांग की।
Wardha Retired Police Protest: सेवानिवृत्त पुलिस कल्याणकारी शिखर संस्था की ओर से राज्यव्यापी निषेध एवं आंदोलन किया गया। वर्धा में आंदोलनकारियों ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा के पास एकत्रित होकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और वित्त मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों ने सातवें वेतन आयोग के तहत वेतन स्तरों में विसंगति दूर करने, परिवार स्वास्थ्य योजना का लाभ देने तथा विधायक रोहित पवार द्वारा पुलिस के संबंध में कथित अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल पर माफी मांगने की मांग की।
संस्था के अनुसार, सातवें वेतन आयोग के तहत लिपिक संवर्ग के कर्मचारी पे मैट्रिक्स एस-6 में नियुक्त होकर 30 वर्ष की सेवा के बाद एस-15 के वेतन स्तर तक पहुंचते हैं। इस प्रकार उन्हें नौ स्तरों की वेतन वृद्धि का लाभ मिलता है। वहीं, पुलिस कांस्टेबल एस-7 के वेतन स्तर पर नियुक्त होते हैं, खुलकर रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अब सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी संगठित होकर अपने अधिकारों और न्यायोचित मांगों के लिए सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
आंदोलनकारियों ने सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को भी कार्यरत पुलिस कर्मचारियों की तरह परिवार स्वास्थ्य योजना का लाभ देने की मांग की। उनका कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए। संस्था के अध्यक्ष अरुण झोटे और उपाध्यक्ष गजाननराव कोपरकर के नेतृत्व में आंदोलन किया गया।
इस दौरान उपाध्यक्ष गजाननराव कोपरकर, रमेशराव पोहाणे, कोषाध्यक्ष राजेंद्र उराडे, सहकोषाध्यक्ष नामदेव किटे और हेमराज बावणे उपस्थित थे। पुलिस बॉयज महिला संगठन की अध्यक्ष वर्षा मारबदे के साथ अर्चना मसराम, कल्पना भंडारी, वंदना नगराले, मेघा देशमुख, रंजना ब्राह्मणे सहित अन्य सदस्यों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। आंदोलन को सफल बनाने के लिए संस्था के सलाहकार श्रीकृष्ण गाऊत्रे, देवराव येनकर, प्रकाश लसुंते, नामदेव धोटे, खुशाल इंचुरकर, रविंद्र पावडे, विजय तोडसाम, अरुण गावंडे, श्रीरंग मारबदे और अशोक निमजे ने प्रयास किए। आंदोलन में बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी शामिल हुए।
पुणे में एमपीएससी के विद्यार्थियों के आंदोलन के दौरान विधायक रोहित पवार द्वारा पुलिस के संबंध में कथित अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किए जाने पर भी संस्था ने नाराजगी जताई। आंदोलनकारियों ने कहा कि इस बयान से पुलिसकर्मियों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने विधायक से पुलिस दल से माफी मांगने की मांग की।