

Ration Card Transfer Case: शासकीय नियमों एवं परिपत्रों का पालन नहीं करने तथा राशन कार्डों के नियमबाह्य हस्तांतरण के मामले में वर्धा तहसील कार्यालय की आपूर्ति निरीक्षण अधिकारी मनीषा माजरखेडे को जिलाधिकारी वान्मथी सी। ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस संबंध में जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से 11 अगस्त 2026 को आदेश जारी किया गया। आदेश के बाद तहसील कार्यालय में खलबली मच गई है। यह मामला वर्धा जिला सहकारी होलसेल एंड रिटेल कंज्यूमर्स सोसायटी से संबद्ध उचित मूल्य दुकान संचालक डी. बी. कुंभलवार के खिलाफ प्राप्त शिकायत की जांच के बाद सामने आया।
वर्धा तहसीलदार ने 20 फरवरी 2026 को संबंधित राशन दुकान की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट जिलाधिकारी कार्यालय को सौंपी थी। जांच में ई-पॉस मशीन क्रमांक 150400100263 के माध्यम से निर्धारित नियमों का पालन किए बिना अनाज मंजूर करने तथा 'साइलेंट आरसी' के नियमबाह्य हस्तांतरण के मामले सामने आए। जांच के दौरान 619 आवेदनों में से 337 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें 25 राशन कार्डधारकों ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने राशन कार्ड हस्तांतरण के लिए कोई आवेदन नहीं किया था। दुकान से अनाज भी प्राप्त नहीं किया।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, मार्च से अप्रैल 2025 के दौरान नियमबाह्य तरीके से हस्तांतरित कार्डधारकों को प्राथमिकता समूह के 26.79 क्विंटल गेहूं और 108.29 क्विंटल चावल वितरित किया गया। इससे शासन को बाजार मूल्य के आधार पर 4,91,426.60 रुपये का आर्थिक नुकसान होने की बात सामने आई। इसके अलावा संबंधित राशन दुकान को अतिरिक्त अनाज मंजूर करने, नियमों का पालन किए बिना राशन कार्ड हस्तांतरित करने तथा दुकान के लिए नामिनी और कमीशन भुगतान हेतु व्यक्ति की नियुक्ति में निर्धारित वरिष्ठ अधिकारी की पूर्व अनुमति नहीं लेने जैसी अनियमितताएं भी जांच में दर्ज की गईं।
आदेश के अनुसार, विभिन्न बिंदुओं के आधार पर शासन को कुल 31,77,791.60 रुपये के आर्थिक नुकसान की बात सामने आई है। जिलाधिकारी के आदेश में कहा गया है कि माजरखेडे ने शासन के निर्णयों एवं परिपत्रों का पालन नहीं करते हुए प्रशासनिक कार्य मनमाने एवं नियमबाह्य तरीके से किए। इससे शासन की छवि धूमिल हुई और उनके कर्तव्य के प्रति अपेक्षित निष्ठा एवं कर्तव्यपरायणता का अभाव पाया गया। इसे महाराष्ट्र नागरी सेवा (शिस्त व अपील) नियम, 1979 के नियम 3(1) (एक), (दो) एवं (तीन) का उल्लंघन मानते हुए नियम 4 के तहत उन्हें निलंबित किया गया है।
आपूर्ति निरीक्षण अधिकारी मनीषा माजरखेडे की कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी वरिष्ठ अधिकारियों के पास शिकायतें प्राप्त होने की बात सामने आई है। इसके बाद उनका तबादला सोलापुर किया गया था। हालांकि, माजरखेडे ने महाराष्ट्र प्रशासकीय न्यायाधिकरण (MAT) में अपील की थी। इसके बाद तबादला रद्द होने से वह वर्धा में ही कार्यरत रहीं।