महाराष्ट्र की राजनीति में 'मराठा संघ सेवा' की बढ़ी पकड़, कैसे बदला वर्धा का सियासी समीकरण?

Maratha Seva Sangh Wardha: वर्धा की राजनीति में मराठा सेवा संघ का दबदबा। सुधीर पांगुल और किरण ठाकरे की जीत ने साबित की सांगठनिक शक्ति। पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर भी रहे हैं संघ का हिस्सा।
Maratha Seva Sangh Wardha
पालकमंत्री पंकज भोयर-सुधिर पांगुल-किरण ठाकरे-तुषार उमाले (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Sambhaji Brigade Wardha: वर्धा जिले की राजनीति में मराठा सेवा संघ की पकड़ लगातार मजबूत होते दिखाई दे रही है। हाल ही में हुए नगराध्यक्ष पद के चुनावों में संगठन से जुड़े दो चेहरे नगराध्यक्ष पद पर विराजमान हुए। वर्धा में  सुधीर पांगुल  तथा देवली नगर परिषद में  किरण ठाकरे   निर्वाचित होकर सत्ता में आए हैं। दोनों लंबे समय से मराठा सेवा संघ के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं और संघ के संगठनात्मक अनुभव ने ही उन्हें नगर राजनीति में मजबूत पहचान दिलाई है।

चुनावों में जीत के बाद सुधीर पांगुल और किरण ठाकरे अब नगर परिषद प्रशासन के माध्यम से जनसेवा का अनुभव हासिल करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में इन्हें बड़े अवसर मिल सकते हैं। खासकर किरण ठाकरे, जो युवा हैं, उनके सामने लंबी राजनीतिक पारी खेलने का अवसर है।

राजनीति में उभरते नाम

मराठा सेवा संघ पिछले कई वर्षों से समाज, शिक्षा और विविध सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहा है। संगठन के माध्यम से युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित हुई, जिसका प्रत्यक्ष लाभ आज डॉ. पंकज भोयर, सुधीर पांगुल और किरण ठाकरे को मिला है। इसी कड़ी में संगठन से उभरता एक और नाम  तुषार उमाले का भी है।

उमाले सामाजिक गतिविधियों के जरिए शहर में अपनी अलग छवि बना रहे हैं और भविष्य में उनका नेतृत्व भी जिले की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकता है। वर्धा शहर में सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाने वालों में स्वर्गीय  नीरज बुटे का नाम विशेष रूप से लिया जाता रहा है।

संभाजी ब्रिगेड के माध्यम से उन्होंने साफ-सुथरी और जनहितैषी राजनीति की छवि बनाई थी।

उनके अचानक निधन से संगठन और शहर दोनों को बड़ा नुकसान हुआ। हालांकि उनकी कार्यशैली ने युवाओं में सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी के लिए नई प्रेरणा छोड़ी है। जिले की राजनीति में मराठा सेवा संघ से तैयार हुआ नेतृत्व अब निर्णायक बनता जा रहा है।

नगर परिषदों से लेकर विधानसभा और मंत्रिमंडल तक उसकी उपस्थिति स्पष्ट दिखाई दे रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह संगठनात्मक शक्ति जिले की राजनीति को किस दिशा में आगे बढ़ाती है।

पालकमंत्री भोयर भी जुडे थे मराठा सेवा संघ से

जिले के पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने भी सक्रिय राजनीति में आने से पहले मराठा सेवा संघ में ही काम किया था। इसी दौरान उनकी पहचान और मित्रता सुधीर पांगुल से हुई। संगठनात्मक काम के दौरान दोनों ने कई सामाजिक अभियानों में साथ काम किया, जिससे राजनीतिक समझ और जनसंपर्क मजबूत होते गए।

बाद में भोयर ने कांग्रेस पार्टी में एंट्री की। डॉ. भोयर युवक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष बने। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी की टिकट पर राजनीति की नई पारी शुरू की और पहली बार विधायक बने।

उसके बाद लगातार तीन बार वर्धा से जीत दर्ज करते हुए उन्होंने अपनी पकड़ और मजबूत की। एक वर्ष पूर्व वे राज्य मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री बनाए गए और उनके पास वर्धा एवं भंडारा जिलों के पालकमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी के रूप में अब उनकी पहचान पूरे राज्य में बनी है।

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