Wardha News: खातेदारों को नहीं मिले जमा रुपये, सहकारी पतसंस्था में बड़ा वित्तीय घोटाला उजागर
Wardha Fraud Case: वर्धा मर्चेंट नागरी सहकारी पतसंस्था में 15 खातेदारों के 1 करोड़ 42 लाख 90 हजार 975 रुपये फंसने का मामला सामने आया है। पुलिस ने संस्था के अध्यक्ष शंभरकर के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Investor Money Stuck (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Wardha Merchant Nagari Cooperative Credit Society: वर्धा मर्चेंट नागरी सहकारी पतसंस्था में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। 15 खातेदारों को 1 करोड़ 42 लाख 975 रुपये की चपत लगाई गई है। शहर पुलिस ने दिनेश थुल की शिकायत पर भीमराव उर्फ भीमा शंभरकर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। समता नगर निवासी दिनेश काशिनाथ धुल (49) बीते अनेक वर्ष से प्लॉट डेवलपमेंट व खरीदी का व्यवसाय करते है।
बीते दस वर्ष से अपने मित्र उदय सिंह भदौरिया, नरेंद्र कापसे, सुनिल बिसेन के -साथ संयुक्त भागेदारी से यह व्यवसाय करते आ रहे हैं। उन सभी का अलग-अलग बैंक में पर्सनल खाता था। सन 2025 में भीमराव थुल सावंगी ग्रापं के सदस्य होने के कारण थुल कि उनके साथ पहचान हुई। उन्होंने वह वर्धा मर्चेंट नागरी सहकारी पतसंस्था के अध्यक्ष होने के बात कहते हुए चारों पार्टनर का संयुक्त खाता पतसंस्था में शुरू करने के लिए कहा।
वर्धा में निवेशकों के करोड़ों रुपये फंसे
शंभरकर की बात मानते हुए वर्धा मर्चेंट नागरी सहकारी पतसंस्था में 25 नवंबर 2025 को खाता खोला। इस खाते में ग्राहकों के चेक व अन्य राशि जमा करते थे। खाते के व्यवहार की जानकारी थुल को मोबाइल पर मिल जाती थी। 5 मई को उनके संयुक्त खाते में 28 लाख 15 हजार 577 रुपये जमा थे। 15 मई को पैसों की आवश्यकता होने के कारण पतसंस्था में गये। परंतु, कर्मचारियों ने पतसंस्था में पैसे नहीं होने की बात कहीं।
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निवेशकों ने दर्ज कराई धोखाधड़ी की शिकायत
जिसके बाद पतसंस्था के अध्यक्ष भीमराव शंभरकर से संपर्क करने पर उसने बड़ी राशि होने के कारण एकमुश्त देना संभव नहीं है और एक सप्ताह के भीतर राशि देने की बात कहीं। 23 मई को धुल में पतसंस्था में तब भी उन्हें राशि नहीं मिलने के कारण उन्होंने दो लाख रुपये सख्त आवश्यकता होने के कारण तुरंत देने की मांग करने पर उन्हें स्पष्ट नकार दिया गया। जिसके उपरांत धुल ने अपने खाते का विवरण पत्र मांगा। परंतु, वह भी देने से इनकार किया गया। यह बात दिनेश थुल ने अन्य संचालकों को बताई। तब सभी ने पतसंस्था के संपूर्ण व्यवहार शंभरकर ही संभालते है।
15 खातेदारों के 1.42 करोड़ रुपये फंसे
पतसंस्था की अनियमितता के संदर्भ में पूछने पर उन्होंने आत्महत्या करने की चेतावनी देकर इसके लिए स्वयं जिम्मेदार होने की बात संचालकों को बताई थी। जिसके बाद दिनेश थुल ने 25 मई को शहर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज की थी। पुलिस ने प्रकरण की विस्तृत जांच करने पर यह बड़ा घोटाला सामने आया। दरमियान अन्य खातेदारों ने भी अपने साथ धोखाधड़ी होने की शिकायत दर्ज की है। पतसंस्था के लिपिक मंगेश कांबले, रोखपाल सोहनील कांबले से पूछताछ व पतसंस्था के रिकॉर्ड देखने पर पतसंस्था में 4 करोड़ 2 लाख 66 हजार 956 रूपये 31 मार्च 2026 तक जमा होने की बात पुलिस को पता चली। पुलिस ने भीमराव शंभरकर के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
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पतसंस्था में लाखों रुपये की राशि का निवेश
दिनेश थुल के 28 लाख 15 हजार 577, भीमराव गावडे के 28 लाख, रजनी लोहकरे के 15 लाख 3 हजार 375, सुखसेन वासेकर के 15 लाख, अनिकेत लोहकरे के 10 लाख, कुणाल नवघरे के 10 लाख, विशाल कांबले के 11 लाख 90 हजार, सुमेध डोफे के 5 लाख 50 हजार, मधुकर भगत के 4 लाख 66 हजार 23, सुनिल गावडे के 3 लाख 25 हजार, शुभागी पाटिल के 1 लाख, सुधीर पडसपगार के 4 लाख 36 हजार, वैभव नगराले के 1 लाख 5 हजार, स्वाति वानखेड़े के 4 लाख व सुधांशु कांबले के 1 लाख समेत कुल 1 करोड़ 42 लाख 90 हजार 975 रुपये पतसंस्था में जमा होने के बावजूद खातेदारों को अपनी राशि नहीं मिली है। सभी पीडितों ने पुलिस में शिकायत दर्ज की है।
