वर्धा में मानसून की देरी से बढ़ी किसानों की चिंता, मृग नक्षत्र के बाद भी बारिश का इंतजार
Kharif Season Sowing Delayed: वर्धा में मृग नक्षत्र के बाद भी मानसून की देरी से किसान चिंतित। कृषि अधिकारी ने 43.9°C तापमान को देखते हुए 100 मिमी बारिश से पहले बुआई न करने की सलाह दी।
- Written By: केतकी मोडक
खेत में स्प्रिंकलर से सिंचाई (सोर्स - फोटो नवभारत)
Wardha Weather Agriculture Concern: मृग नक्षत्र प्रारंभ हुए तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन जिले में अब तक मानसून की दस्तक नहीं हुई है। इतना ही नहीं, मानसून पूर्व होने वाली बारिश ने भी इस वर्ष जिले से मानो मुंह मोड़ लिया है। लगातार पड़ रही भीषण गर्मी और वर्षा के अभाव के कारण किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। खरीफ सीजन की तैयारियों में जुटे किसान अब आसमान की ओर टकटकी लगाए बारिश का इंतजार कर रहे जिला मुख्य रूप से कृषि प्रधान क्षेत्र है।
जहां बड़े पैमाने पर कपास, सोयाबीन और तुअर की खेती की जाती है। इन फसलों की बुआई के लिए समय पर वर्षा होना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। जून माह का दूसरा सप्ताह शुरू होने के बावजूद मौसम में अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है। बुधवार को जिले का अधिकतम तापमान 43.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मृग नक्षत्र में की गई बुआई फसलों के लिए लाभदायक मानी जाती है। इस दौरान पर्याप्त नमी मिलने पर बीजों का अंकुरण बेहतर होता है और उत्पादन में भी वृद्धि की संभावना रहती है। लेकिन इस बार वर्षा नहीं होने से किसान बुआई का निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। कई किसानों ने खेतों की प्रारंभिक तैयारी तो कर ली है, लेकिन बारिश के अभाव में बुआई कार्य शुरू नहीं हो सका है।
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तेज धूप और बढ़ते तापमान का असर खेत मशागत के कार्यों पर भी दिखाई दे रहा है। दिन के समय खेतों में काम करना मुश्किल हो गया है। जिससे कृषि कार्यों की गति धीमी पड़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं और आम नागरिकों को भी गर्मी से काफी परेशानी हो रही है।
किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी वर्षों नहीं हुई तो खरीफ सीजन की बुआई प्रभावित हो सकती है। वहीं कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि मानसून जल्द ही जिले में पहुंचेगा और किसानों को राहत मिलेगी। फिलहाल पूरे जिले में मानसून के आगमन को लेकर उत्सुकता और चिंता का माहौल बना हुआ है।
प्रिंकलर के माध्यम से दिया जा रहा पानी
जिले के सभी आठों तहसीलों में कम या अधिक मात्रा में कपास की सूखी बुआई होने की वास्तविकता सामने आई है। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, उन्हीं किसानों ने सूखी बुआई का साहस किया है। वर्तमान में वे प्रिंकलर के माध्यम से सिंचाई कर रहे हैं। वास्तव में जिले में अभी तक अच्छी और लगातार बारिश नहीं हुई है। ऐसे में यदि बारिश और अधिक देर से होती है, तो सूखी बुआई करने वाले किसानों की परेशानियों में काफी बढ़ोत्तरी होने की संभावना है।
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सूखी बुआई का जोखिम न उठाए किसान
वर्धा जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी अरविंद उपरिकर ने कहा है कि “इस वर्ष खरीफ सीजन में जिले में लगभग 4 लाख 18 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों की खेती होने वाली है। जिले में अभी तक बुआई योग्य वर्षा नहीं हुई है। साथ ही, बारिश में और देरी होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए किसानों की 100 मिमी वर्षों होने के बाद ही बुआई कार्य में तेजी लानी चाहिए, साथ ही किसानों को सूखी बुआई का जोखिम नहीं उठाना चाहिए।”
