एचटीबीटी कपास बीज विवाद( सोर्स: सोशल मीडिया )
Wardha Agriculture Policy: वर्धा देश का कानून तोड़कर कपास का एचटीबीटी संकरित बीज की निर्मिति कंपनियों द्वारा की जा रही है। फिर भी सरकार द्वारा किसी भी प्रकार की कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही, ऐसा सवाल किसान नेता विजय जावंधिया ने उपस्थित किया है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस संदर्भ में ज्ञापन भेजा है। मोनस्नैटो बायर बहूराष्ट्रीय बीज-बीज रसायन कंपनी द्वारा कृमिनाशक को प्रतिकारण जाति का विकास किया है। भारत सरकार ने बीटी कॉटन को मंजूरी दी है।
कंपनियों ने इसे संकरित जाति में ही किसानों को उपलब्ध कराया है। प्रारंभ में सिर्फ एक जीन का ही समावेश था। अब दी जीन का समावेश है। जिसे बोलगार्ड 2 के नाम से जाना जाता है, भारत सरकार ने बीटी आरआर फ्लेक्स जाति को अभी तक मंजूरी नहीं दी है।
इस जाति से किसान बायर मोनसॅन्टो के कृमिनाशक का खड़ी फसल पर उपयोग कर सकता है। इस ग्लायफोसेट कीटनाशक के पर्यावरण ओर मानव शरीर पर घातक है।
किसान को कपास के वायरस का मुकाबला कर सकते हैं, ऐसा बीज देना चाहते है। अपने किसानों से इस संबंध में अपने विचार सुझाव भेजने की अपील की है।
इसके लिए टोल फ्री क्रमांक 18001801551 मैंने इस नंबर पर फोन लगाया और उन्हें हमारी मांग आप तक भेजने की विनती की है। जवाब मिला हम नहीं भेज सकते। क्या मै विनम्रता से कह सकता हूं यह क्या नाटक है।
बीज कंपनियों के दबाव में एचटीबीटी को अनुमति देने के लिए किया जा रहा नाटक है, हमारी मांग है कि, यह सिर्फ हायब्रिड में ही क्यों सरल जाती में क्यों नहीं।
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दूसरा आप जिस वायरस की बात कर रहे हैं हमारी जानकारी है कि एचटी जीन किसी भी कीटक की रोकथाम के लिए नहीं है। सिर्फ कीटनाशक की उपयोग की सुविधा के लिए है।
हमें समय दीजिए हमारी व्यथा की कथा आपके ओर अधिकारियों के समक्ष रखने की, ऐसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसान नेता विजय जावंधिया ने भेजे पत्र में कहा है।